नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) प्रमुख रामविलास पासवान ने कहा है कि राम मंदिर मुद्दे पर कोई कानून या अध्यादेश लाना संभव नहीं है. हर किसी को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए. उधर, लोकसभा चुनाव को लेकर बिहार में सीट बंटवारे पर भी पासवान ने कुछ सीटें छोड़ने की ओर इशारा किया.

इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक, राम मंदिर निर्माण के लिए कानून लाए जाने संबंधी आरएसएस और विहिप की मांग के बारे में पूछे जाने पर पासवान ने कहा कि यह संभव नहीं है. राम मंदिर का मुद्दा बीजेपी के घोषणापत्र में हो सकता है और आरएसएस, विहिप व शिवसेना इसको लेकर मांग कर सकती हैं, लेकिन यह एनडीए सरकार के एजेंडे में नहीं है. नरेंद्र मोदी ने कहा था कि संविधान उनका धर्म है और संसद उनका मंदिर है. उन्होंने राम मंदिर-बाबरी मस्जिद पर कभी कोई बात नहीं की है. पासवान ने कहा कि बीजेपी इस पर बात कर सकती है लेकिन फोकस विकास और समाज के सभी वर्गों को एक साथ रखने पर होगा.

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राम मंदिर के मुद्दे से कोई राजनीतिक लाभ नहीं: पासवान
पासवान ने कहा कि राम मंदिर के मुद्दे से किसी को कोई राजनीतिक लाभ मिल सकता है, इस पर संशय है. क्‍योंकि बाबरी मस्जिद को 1992 में ध्वस्त कर दिया गया था. अगर यह मुद्दा राजनीति लाभ वाला होता तो यूपी में बीजेपी को पूर्ण बहुमत हासिल करने में 25 साल क्यों लग गए.

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2014 में एलजेपी ने बिहार की सात सीटों पर लड़ा था चुनाव
रामविलास पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी बिहार में सीट बंटवारे को लेकर हुए समझौता के तहत सीट छोड़ने को लेकर तैयार थी, क्‍योंकि 22 सांसदों वाली पार्टी भाजपा भी ऐसा कर रही है. बीजेपी बलिदान कर रही है तो हमें क्यों रूक जाना चाहिए? हम इसके बारे में सोच सकते हैं, पासवान ने ईटी को बताया कि वे बिना सीटों की संख्‍या के भी चुनाव लड़ना चाहते हैं. बता दें कि मौजूदा समय एलजेपी के छह सांसद हैं, जबकि 2014 लोकसभा चुनाव में एलजेपी ने बिहार की सात सीटों पर चुनाव लड़ा था.