पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी ने राज्य की राजधानी में कहा कि बिहार में ग्राम पंचायत चुनाव में अभी अति पिछड़ा को 20 और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) को 17 प्रतिशत आरक्षण है. उन्होंने कहा कि अगले पंचायत चुनाव में 13 प्रतिशत तक और आरक्षण की सीमा बढ़ाई जा सकती है. पटना में बुधवार को मोदी भाजपा अति पिछड़ा वर्ग मोर्चा की ओर से रवीन्द्र भवन में आयोजित ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर जयंती समारोह’ को संबोधित करते हुए आरजेडी और कांग्रेस से कई सवाल पूछे.

डिप्टी सीएम मोदी ने कहा कि वर्ष 1931 में पहली जातीय जनगणना के 83 सालों के बाद केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने वर्ष 2021 में जातीय जनगणना कराने का निर्णय लिया है. जातीय जनगणना के आंकड़ों के आधार पर आरक्षण की सीमा बढ़ाने के लिए अदालत की बाधा दूर करने के साथ अगर जरूरत पड़ी तो सरकार संविधान संशोधन भी करेगी.

डिप्टी सीएम राजद से पूछा, “27 साल तक बिहार में पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराया गया? साल 2003 में हुए पंचायत चुनाव में एससी/एसटी और अतिपिछड़ों को आरक्षण से वंचित क्यों किया गया? कर्पूरी ठाकुर द्वारा आर्थिक आधार पर दिए गए तीन प्रतिशत आरक्षण को 1992 में क्यों समाप्त किया गया?”

मोदी ने आरजेडी पर आरक्षण के नाम पर बरगलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले विधानासभा चुनाव में भाजपा ने अतिपिछड़े वर्ग से आने वाले 25 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे थे, जबकि आरजेडी ने पिछड़े वर्ग से आने वाले पांच लोगों को ही टिकट दिया.

उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, “10 साल तक केन्द्र की सत्ता में रहने के बावजूद कर्पूरी फॉर्मूले के समान पिछड़ा वर्ग की सूची के वर्गीकरण का प्रयास क्यों नहीं किया गया?”

कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस 45 वर्षो तक सत्ता में रहने के बावजूद पिछड़े वर्गो के लिए आयोग का गठन नहीं किया और मंडल व मुंगेरीलाल कमीशन की रिपोर्ट लागू नहीं होने दी. उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि आखिर वर्ष 1931 के बाद अब तक जाति आधारित जनगणना क्यों नहीं कराई गई.
भाजपा नेता ने कांग्रेस पर अब तक गरीब सवर्णों को आरक्षण नहीं देने पर भी सवाल उठाए.