नई दिल्ली. अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब अररिया लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में बिहार के सीएम नीतीश कुमार और उनकी सहयोगी भाजपा को राजद ने चुनाव में धूल चटाई है. अब एक बार फिर सीएम नीतीश कुमार की छवि को प्रभावित करने वाला चुनाव परिणाम, जोकीहाट विधानसभा सीट के उपचुनाव के रूप में सामने आ रहा है. महागठबंधन को छोड़कर भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने के बाद भी सीएम नीतीश कुमार बिहार की जनता के बीच अपनी सर्वमान्य नेता की छवि बनाए रखने का प्रयास करते रहे हैं. लेकिन मार्च में प्रदेश के कई जिलों में हुई सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं और इन घटनाओं में भाजपा नेताओं के शामिल होने के आरोपों के बरक्स नीतीश सरकार कठघरे में खड़ी की गई. इसके बाद अररिया उपचुनाव में राजग की हार ने एक और ‘जख्म’ दिया. और अब जोकीहाट विधानसभा उपचुनाव का परिणाम, सीएम नीतीश के लिए जले पर नमक की तरह साबित हो रहा है. सियासी जानकार बिहार में हुए हालिया उपचुनावों में सत्तारूढ़ गठबंधन की हार को नीतीश के महागठबंधन छोड़ने और राजग से जुड़ने के प्रभाव के रूप में देख रहे हैं. इन घटनाओं को नीतीश और भाजपा के बीच सब कुछ सही नहीं होने से भी जोड़कर देखा जा रहा है. Also Read - Covid-19 in Bihar Update: प्रवासियों ने बिहार में तेजी से बढ़ाई संक्रमितों की संख्या, 163 नए मामले

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जोकीहाट क्यों बना नीतीश के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न

बंगाल की सीमा से सटे जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र में 70 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम समुदाय से आते हैं. यह इलाका राजद के पूर्व सांसद तस्लीमुद्दीन का परंपरागत क्षेत्र रहा है. तस्लीमुद्दीन और उनके बेटे अब तक 9 बार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. जदयू के विधायक रहे सरफराज आलम के अररिया का सांसद बन जाने के कारण ही जोकीहाट सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं. इस सीट पर पिछले 4 चुनावों से जदयू के प्रत्याशी चुनाव जीतते रहे हैं. इसलिए यह जानते हुए भी कि जोकीहाट तस्लीमुद्दीन और उनके परिवार के प्रभाव वाला क्षेत्र है, यहां पर विरोधियों के लिए सेंध लगाना आसान नहीं होगा, नीतीश कुमार ने जदयू की परंपरागत सीट बचाने की जंग लड़ी. उन्होंने दिवंगत सांसद तस्लीमुद्दीन के छोटे बेटे और राजद उम्मीदवार के शाहनवाज आलम के सामने मुर्शीद आलम को बतौर प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया. लेकिन उपचुनावों के परिणाम ने बता दिया कि क्षेत्र के लोग नीतीश कुमार के राजग में जाने से नाराज हैं.

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लोगों ने कहा- नीतीश को क्या जरूरत थी पाला बदलने की

राजद के पूर्व सांसद तस्लीमुद्दीन के गांव सिसौना के रहने वाले लोग नीतीश कुमार के महागठबंधन को छोड़कर, राजग में जाने से नाखुश हैं. सिसौना के वजूद आलम ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि नीतीश को आखिर क्या जरूरत थी कि वे पाला बदलें. सरकार ठीक ढंग से चल रही थी. इसके अलावा सीएम नीतीश कुमार से कई और लोग भी नाराज थे. सीएम नीतीश ने चुनाव प्रचार के दौरान जिस उदाहाट क्षेत्र में जनसभा को संबोधित किया था, वहां के रहने वाले और इस क्षेत्र की राजनीति को नजदीक से देखने वाले मोहम्मद अफरोज कहते हैं कि नीतीश के लिए यह सीट बचा पाना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि जद (यू) ने ऐसे व्यक्ति को अपना प्रत्याशी बनाया है, जिस पर मूर्ति चोरी से लेकर कई तरह के संगीन आरोप हैं. जद (यू) के कार्यकर्ता भी हताश दिख रहे हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश ने अपनी जनसभा में विकास की बात कर लोगों को आकर्षित करने का भरसक प्रयास किया. इस क्षेत्र के लोग भी नीतीश के विकास को नहीं नकार रहे हैं, परंतु प्रत्याशी को लेकर यहां के लोग नाराज हैं.

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नीतीश-भाजपा की दोस्ती पर भारी पड़ी जीत

कहने के लिए ही जोकीहाट में राजग ने अपना उम्मीदवार उतारा था, वास्तविक रूप में यह सीएम नीतीश कुमार और राजद की लड़ाई थी. लेकिन भारतीय जनता पार्टी के साथ जाने का खामियाजा, इस उपचुनाव के नतीजों के रूप में नीतीश कुमार को भुगतना पड़ा. जोकीहाट में 41 हजार से ज्यादा वोटों से राजद उम्मीदवार शाहनवाज आलम की जीत से बिहार में एक बार फिर सियासत गरमाएगी. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि नीतीश कुमार और भाजपा के संबंधों पर भी इसका असर देखने को मिलेगा. हाल के दिनों में जिस तरह से नीतीश कुमार ने पहले पीएम नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले की आलोचना की और उसके बाद 15वें वित्त आयोग के संदर्भ में एक लेख लिखकर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की पुरानी मांग दोहराई है, इससे राजग गठबंधन अप्रभावित हुए बिना नहीं रह सकेगा. ऊपर से केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान भी विशेष राज्य के मुद्दे पर नीतीश कुमार का साथ दे रहे हैं. इससे भी बिहार राजग में खलबली मचनी स्वाभाविक है.