Bihar Politics: चारा घोटाले में चाईबासा कोषागार से 33 करोड़ 67 लाख रुपये के गबन से जुड़े एक मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सुनवाई नौ अक्टूबर तक के लिए टाल दी क्योंकि उन्होंने इस मामले में मिली पांच वर्ष कैद की सजा की आधी अवधि अब तक पूरी नहीं की है.
न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ के समक्ष आज इस मामले में बहस हुई. इस दौरान सीबीआई के अधिवक्ता ने आपत्ति उठाई और कहा कि चाईबासा कोषगार से गबन के इस मामले में लालू को पांच वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी और उन्होंने इस मामले में तय सजा का आधा समय अब तक हिरासत में नहीं बिताया है जिसके चलते उनकी जमानत याचिका पर अभी सुनवाई उचित नहीं है.

सीबीआई ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि लालू यादव ने चाईबासा कोषागार से जुड़े इस मामले में जमानत के लिए मुख्य आधार यही बनाया है कि उन्होंने विशेष सीबीआई अदालत द्वारा दी गई पांच वर्ष की कैद की सजा का आधा समय हिरासत में व्यतीत कर लिया है जो सत्य नहीं है.Also Read - क्या साथ आएंगे तेजस्वी यादव और चिराग पासवान? लालू प्रसाद ने की गठबंधन की वकालत

केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि लालू को इस मामले में सजा की आधी अवधि पूरी करने में अभी 23 दिन का समय शेष है जिसके बाद न्यायालय ने मामले की सुनवाई नौ अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी. Also Read - Bihar News: जदयू का नया अध्यक्ष कौन? दिल्ली में आज राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में होगा ऐलान!

उच्च न्यायालय में गत 28 अगस्त को सीबीआई के वकील के बीमार होने के चलते इस मामले में सुनवाई नहीं हो सकी थी. राजद प्रमुख ने गत तीन जुलाई को जमानत दायर की थी. संबंधित मामले में जमानत होने की स्थिति में भी लालू रिहा नहीं हो सकेंगे क्योंकि चारा घोटाले में दुमका कोषागार से गबन के मामले में उन्हें 14 वर्ष कैद की सजा मिली है और उक्त मामले में भी वह इस समय जेल में हैं. Also Read - Bihar News: बिहार के जदयू विधायक की दबंगई- 'लाठी पार्टी के विधायक हैं, गर्दा उड़ा देंगे...' देखें Viral Video

दुमका मामले में उच्च न्यायालय से उनकी जमानत याचिका भी पहले ही खारिज हो चुकी है. लालू यादव के वकील देवर्षि मंडल ने कहा कि उनके मुवक्किल को चाईबासा मामले में जमानत मिलने की पूरी संभावना है.

इनपुट-भाषा