नई दिल्ली. बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम स्कैंडल की जांच के बीच सीबीआई एसपी के तबादले और मामले की प्रगति रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने पर पटना हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है. साथ ही जांच की खबरें कोर्ट से पहले मीडिया तक पहुंचने पर भी सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई है. मुजफ्फरपुर के स्थानीय अखबारों में छपी खबरों के अनुसार, गुरुवार को सीबीआई को इस मामले में जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करनी थी, लेकिन जांच एजेंसी ऐसा नहीं कर पाई. इसको लेकर हाईकोर्ट ने एजेंसी को फटकारा. चीफ जस्टिस एम.आर. शाह और जस्टिस रविरंजन की खंडपीठ ने जांच के बीच मामले के अनुसंधान अधिकारी (आईओ) सीबीआई के एसपी के तबादले पर भी सवाल उठाया. कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह आगामी 27 अगस्त को सील बंद लिफाफे में प्रगति रिपोर्ट पेश करे.

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सीबीआई की विश्वसनीयता पर खड़े किए सवाल
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शेल्टर होम मामले की जांच के बीच सीबीआई के एसपी के तबादले को लेकर सवाल उठाए. मुजफ्फरपुर से प्रकाशित अखबार हिन्दुस्तान के अनुसार, चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि यह कैसी जांच है जिसकी जानकारी मीडिया को पहले रहती है. कोर्ट ने जांच के बीच आईओ के बदले जाने पर भी सवाल उठाया. साथ ही सीबीआई को आदेश दिया कि वह जांचकर्ता बदले जाने के बारे में पूरी जानकारी देने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि बड़े आश्चर्य की बात है कि एक महीने के भीतर आईओ को बदल दिया गया और उसे पटना में ही रखा गया. यह सीबीआई की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है. कोर्ट ने कहा कि इस कांड में सीबीआई की विश्वसनीयता दांव पर लगी हुई है तो जांच के बीच आईओ को कैसे बदल दिया गया.

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मीडिया में खबरें छपने को लेकर भी नाराजगी
कोर्ट ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है. सभी की विश्वसनीयता दांव पर लगी हुई है. इसलिए सीबीआई को हर तारीख पर अपनी जांच की प्रगति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में देनी होगी. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शेल्टर होम स्कैंडल की जांच के दौरान मीडिया में इससे संबंधित खबरें छपने को लेकर भी हैरानी जताई. बता दें कि हाईकोर्ट इस मामले की मॉनिटरिंग भी कर रहा है. इसके मद्देनजर टीवी और अखबारों में जांच से संबंधित खबरें छपने को लेकर भी कोर्ट ने आश्चर्य प्रकट किया. कोर्ट ने कहा कि सीबीआई जांच से संबंधित तथ्यों की जानकारी प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को कैसे हो जाती है? मीडिया रिपोर्ट के कारण जांच प्रभावित हो सकती है. बता दें कि TISS की सोशल ऑडिट रिपोर्ट के बाद मुजफ्फरपुर शेल्टर होम स्कैंडल का खुलासा हुआ था. मामले में शेल्टर होम के संचालक ब्रजेश ठाकुर को मुख्य आरोपी बनाते हुए बिहार के समाज कल्याण विभाग ने उसके खिलाफ केस दर्ज कराया था. घटना को लेकर देशभर में प्रतिक्रिया हुई, जिसके बाद बिहार सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी.