नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को सनसनीखेज मुजफ्फरपुर आश्रयगृह मामले को बिहार से दिल्ली की एक अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश देते हुए कहा कि ‘‘बहुत हो चुका’’, बच्चों से इस तरह का बर्ताव नहीं किया जा सकता. साथ ही न्यायालय ने कहा कि दिल्ली की अदालत छह महीने में मामले की सुनवाई पूरी करेगी. नीतीश कुमार सरकार को मामले के स्थानांतरण और उसके बाद की सुनवाई के लिए सभी जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए उच्चतम न्यायालय ने प्रदेश भर में आश्रय गृहों में बच्चों के यौन और शारीरिक उत्पीड़न की घटनाओं पर कड़ी नाराजगी जताई.

मुजफ्फरपुर में एक गैर सरकारी संगठन द्वारा संचालित आश्रय गृह में कुछ लड़कियों के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न की घटना टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) की रिपोर्ट के बाद सामने आई थी. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में अब तक हुई प्रगति को गंभीरता से लिया और कहा कि वह अब मामले को यहां साकेत जिला अदालत परिसर में स्थित पॉक्सो अदालत में स्थानांतरित करेगी. पीठ में न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और संजीव खन्ना भी शामिल हैं. पीठ ने कहा कि दिल्ली की अदालत में दस्तावेजों का स्थानांतरण दो हफ्ते के अंदर पूरा हो जाना चाहिए और वरीयता देते हुए ‘दैनिक’ आधार पर सुनवाई कर छह महीनों के अंदर मुकदमे को पूरा कर लिया जाना चाहिए. पीठ ने आश्रय गृहों की संख्या, उनके प्रबंधन और उन पर प्रशासनिक नियंत्रण से जुड़े सवालों पर बिहार सरकार की तरफ से पेश हुए वकील की अपर्याप्त प्रतिक्रिया पर भी नाराजगी जाहिर की.

पीठ ने कहा, “बहुत हो चुका. बच्चों से ऐसा व्यवहार नहीं किया जा सकता. आप अपने अधिकारियों को बच्चों से ऐसा बर्ताव नहीं करने दे सकते. बच्चों को बख्श दीजिए.” पीठ ने गुरुवार को शुरुआत में ही सवाल उठाया कि वहां कितने आश्रय गृह हैं और उनका वित्त पोषण कैसे और कितना होता है तथा उनके संचालन में सरकारी नियंत्रण की क्या प्रकृति होती है. इसमें कहा गया, “हम आपसे (राज्य सरकार से) हलफनामा दायर करने को नहीं कहेंगे. हलफनामे का मतलब दो हफ्ते का समय. सवालों का एक-एक कर जवाब दीजिए. हमें सही विवरण बताइए.”

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पीठ ने कहा, “हम आपसे (वकील) से कुछ सवाल पूछ रहे हैं. अगर आप जवाब देने की स्थिति में हैं तो जवाब दीजिए अन्यथा हम आपके मुख्य सचिव या उस अधिकारी को बुलाएंगे जो तथ्यों को जानता हो. शाम तीन बजे तक आपके मुख्य सचिव यहां होंगे. पटना हर तरह से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है.” पीठ ने कहा, “क्या आप आश्रयगृह में बच्चों से ऐसा बर्ताव करते हैं. आप अफसरों को बच्चों से ऐसा बर्ताव नहीं करने दे सकते जैसा वे अभी कर रहे हैं…सवाल अब बड़ा हो जाएगा.” दोपहर बाद न्यायालय ने कहा कि बिहार आश्रयगृह मामला ऐसे ही दूसरे लंबित मामलों के साथ लिया जाएगा.

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को निर्देश दिया था कि वह बिहार के 16 आश्रय गृहों में रह रहे बच्चों के शोषण के आरोपों की जांच करे और इसके अलावा मुजफ्फरपुर मामले के स्थानांतरण का आदेश दिया. मुजफ्फरपुर आश्रय गृह मामले में टीआईएसएस की रिपोर्ट के बाद 31 मई 2018 को 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. इस मामले में अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

(इनपुट – एजेंसी)