पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को यहां कहा कि कोई लाख चाहेगा, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में कोई इधर-उधर नहीं कर सकता. नीतीश ने तेजस्वी को सलाह देते हुए कहा कि आगे बढ़ना है तो व्यवहार ठीक रखना होगा. नवगठित विधानसभा के पहले सत्र के समाप्त होने के बाद तेजस्वी द्वारा निजी टिप्पणी किए जाने पर सदन से बाहर पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “मेरा क्या चरित्र है लोगों को मालूम नहीं है क्या? अब उनका सलाहकार कौन है, ऐसे बयान दे रहे हैं, यह समझ से परे है. आगे बढ़ना है तो व्यवहार करना ठीक से सीखना चाहिए.” Also Read - Bihar: नीतीश को अब सता रहा है अपनी सीएम कुर्सी जाने का डर, इशारों-इशारों में कही ये बड़ी बात

उन्होंने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के कथित फोनवार्ता पर कहा कि, लोग सभी बातें समझ रहे हैं. उन्होंने कहा, कैसी-कैसी बातें हो रही हैं, सब सामने आ रहा है. जेल से कैसे फोन आ रहा है. यह कोई आचरण है. जिसको भी फोन आ रहा है, अब वहीं बता रहे हैं. कोई मर्यादा है क्या? उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि कोई लाख चाहे लेकिन राजग को कोई इधर-उधर नहीं कर सकता है. Also Read - लालू यादव की तबीयत ख़राब होने के सवाल पर CM नीतीश कुमार बोले- अब तो मुझे...

इससे पूर्व बिहार विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लेते हुए विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सदन में मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी कर दी. उन्होंने कहा, “नीतीश अपनी चुनावी सभाओं में लालू प्रसाद के 9 बच्चों की बात करते थे. कहते थे बेटी पर भरोसा नहीं था, बेटे के लिए 9 बच्चे हुए. क्या नीतीश कुमार को लड़की पैदा होने का डर था, इसलिए उन्होंने दूसरा बच्चा नहीं पैदा किया?” Also Read - Bihar Politics: JDU नेता ने तेजप्रताप के बारे में क्यों कहा-पता नहीं जी, कौन-सा नशा करता है...जानिए

इसके अलावा राजद नेता ने कहा कि, यह किसी मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता कि आप मेरे परिवार की बहनों को राजनीति में घसीटकर लेकर आएं. तेजस्वी ने नीतीश कुमार पर हत्या का भी आरोप लगा दिया.

इधर, इस बयान पर नीतीश कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि, “वह तो हमने मजाक में कह दिया. हम प्रजनन दर की बात करते रहे, उसी में मजाक में कोई बात कह दिए. लोग तो खुद ही अपने बारे में सोचते हैं. मतलब एक बात तो समझ लीजिए कि लोगों को बातें लगती हैं.” इसके अलावा उन्होंने कहा कि तेजस्वी ने जो बातें कहीं वैसी बात नहीं करनी चाहिए. सदन में हल्की बात नहीं होनी चाहिए.