Unlock Bihar: पूरे देश में जहां कोरोना के नए संक्रमण के मामलों में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है वहीं बिहार में भी हर दिन कोरोना के नए मामलों में तेजी से कमी आ रही है. अब ऐसे में बिहार में अनलॉक के तहत छह जुलाई के बाद स्थितियां अगर ऐसे ही सामान्य बनी रहीं तो प्रदेश  में शिक्षण संस्थान भी खोले जाएंगे. बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी स्‍पष्‍ट किया है कि यदि स्थिति में सुधार होता रहा तो सुरक्षा के मानकों को ध्यान में रखकर सख्त गाइडलाइंस के साथ जुलाई में सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेज खोले जा सकेंगे.Also Read - Coronavirus in India : देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 15,940 नए केस, 20 मरीजों की मौत

शिक्षा विभाग तीन चरणों में कर रहा है तैयारी Also Read - DGCI ने 7 से 11 साल तक के बच्चों के लिए कोवोवैक्स के आपातकाल इस्तेमाल को मंजूरी दी: सूत्र

बिहार के शिक्षामंत्री ने आगे कहा कि शिक्षा विभाग के स्तर से शिक्षण संस्थानों को खोलने की तैयारी चल रही है. छह जुलाई के बाद पहले चरण में विश्वविद्यालय और कॉलेज खोले जाएंगे. दूसरे चरण में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय (कक्षा 9वीं से 12वीं तक) खोले जाएंगे. वहीं, तीसरे चरण में प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों (कक्षा एक से आठ तक) के बच्चों के लिए कक्षाएं शुरू की जाएंगी. इस तरह से तीन चरणों में शिक्षा विभाग शिक्षण संस्थानों को खोलने की तैयारी कर रहा है. Also Read - फिर पैर पसार रहा है कोरोना? 103 दिनों के बाद 24 घंटों में 8 हजार से ज्यादा नए केस, एक्टिव मरीज 40 हजार के पार

स्कूल खोलने की गाइडलाइंस होगी जारी

बता दें कि कोरोना गाइडलाइंस के नियमों के तहत बिहार में धीरे-धीरे शिक्षण संस्थान तो खोले जाएंगे लेकिन विद्यार्थियों की उपस्थिति पर विभाग की ओर से विशेष रूप से गाइडलाइंस जारी की जाएगी.

शिक्षा मंत्री ने कहा, “ सरकार छात्रों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए शैक्षणिक संस्थानों को फिर से खोलने की योजना बना रही है. माता-पिता की सहमति से ही वैकल्पिक दिनों में 50 फीसद क्षमता के साथ ऑन-कैंपस कक्षाएं संचालित की जाएंगी. निजी और सरकारी दोनों शैक्षणिक संस्थानों को छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए विभाग की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन करना होगा.”

बच्चों के हित में लिया गया है फैसला

शिक्षा मंत्री ने कहा, “हम शिक्षण संस्थानों को इसलिए खोलना चाह रहे हैं कि कोरोना महामारी के संक्रमण के चलते लगातार स्कूल-कॉलेज समेत अन्य शिक्षण संस्थान बंद हैं, इससे बच्चों की पढ़ाई बाधित है. विशेषकर छोटे बच्चों की पढ़ाई का सिलसिला ही टूट जाता है, जिसे फिर पटरी पर लाना कठिन हो जाता है.”