नई दिल्लीः साढ़े तीन साल पहले बिहार के लिए दूसरे एम्स की हुई थी घोषणा, अब तक स्थान नहीं हुआ तयसूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से प्राप्त जानकारी में बताया गया है, ‘‘बिहार में एम्स बनाने की घोषणा साल 2015-16 के संघीय बजट में की गई थी. लेकिन राज्य सरकार ने अब तक एम्स के लिए किसी जगह की पेशकश नहीं की है.’’Also Read - Gandhi Maidan Blast case: NIA कोर्ट ने 10 में से 9 आरोपियों को दोषी करार दिया, 1 बरी; सजा पर फैसला नवंबर में

मंत्रालय ने बताया कि एम्स का निर्माण तभी शुरू किया जा सकता है जब स्थान को अंतिम रूप दे दिया जाए. इसके बाद वित्त व्यय समिति (ईएफसी) एवं कैबिनेट की मंजूरी ली जायेगी. आरटीआई कार्यकर्ता ब्रजेश कुमार ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से पूछा था कि साल 2015 में बिहार में नये एम्स की स्थापना की घोषणा की गई थी. इस बारे में फिलहाल क्या स्थिति है और कार्य कब शुरू किया जाएगा. Also Read - Video: लालू यादव के बयान पर बोले नीतीश कुमार- 'वह मुझे गोली मरवा सकते हैं और...'

2015-16 के बजट में हुई थी घोषणा
उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय चिकित्सा आयुर्विज्ञान संस्थान पर मरीजों के बढ़ते दबाव को देखते हुए मोदी सरकार ने बिहार में एम्स की स्थापना की घोषणा की थी. 2015-16 के बजट भाषण में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसका प्रस्ताव भी किया था. आज करीब साढ़े तीन साल बीत गए, लेकिन प्रदेश सरकार एम्स के लिए 200 एकड़ जमीन उपलब्ध नहीं करा पाई. Also Read - RJD Chief Lalu Yadav ने नीतीश कुमार को बताया अहंकारी और लालची, कांग्रेस के बारे में अब कही ऐसी बात

केंद्र को जमीन और जगह का इंतजार है. राज्य सरकार तय करेगी कि नया एम्स कहां बनेगा. यह तय करने के बाद संस्थान के लिए जमीन भी राज्य सरकार ही उपलब्ध कराएगी. एम्स के लिए ऐसी जगह पर कम से कम दो सौ एकड़ जमीन चाहिए जहां, बिजली, पानी और सड़क की सुविधा हो.

कुंडली मारकर बैठी है नीतीश सरकार
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार जमीन तथा आवश्यक संरचना उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार को अब तक कई पत्र भेज चुकी है. उल्लेखनीय है कि बिहार के पटना में एक एम्स पहले से परिचालन में है. बिहार में दूसरे एम्स का विषय राजनीतिक मुद्दा बन चुका है. इसे लेकर राजद और जन अधिकार पार्टी राज्य में सत्तारूढ़ जदयू और भाजपा की गठबंधन सरकार पर निशाना साध रही है.

जन अधिकार पार्टी के नेता राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समावेशी विकास की बात करते हैं लेकिन कोशी सीमांचल की घोर उपेक्षा कर रहे हैं. दूसरे एम्स पर पहला हक कोशी सीमांचल का है और उसे यह मिलना ही चाहिए. राजद सांसद शैलेष कुमार उर्फ बुलो मंडल ने राज्य के भागलपुर जिले में दूसरा एम्स खोलने और राज्य सरकार से इसके लिए तत्काल जमीन उपलब्ध कराने की मांग की है.