
Gargi Santosh
गार्गी संतोष Zee Media के India.com में सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड न्यूज सेक्शन संभालती हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, स्पोर्ट्स और वायरल ... और पढ़ें
Who was Sushil Kumar Modi: बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री व पूर्व राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी का सोमवार रात निधन हो गया. भाजपा के भीष्म पितामह माने जाने वाले सुशील मोदी ने 72 साल की उम्र में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) अस्पताल में आखिरी सांस ली. बता दें कि, वह बीते छह महीने से कैंसर से जूझ रहे थे. उन्होंने खुद ही ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इस बात की जानकारी दी थी, और लोगों की तरह सुशील मोदी भी इस गंभीर बीमारी से नहीं लड़ पाए. उन्होंने सोमवार यानि 13 मई की रात आखिरी सांस ली. चलिए आपको बताते हैं सुशील मोदी के बारे में वो सभी जरूरी जानकारी जो आपके पता होनी चाहिए-
सुशील कुमार मोदी का जन्म 5 जनवरी, 1952 को बिहार की राजधानी पटना में हुआ था. उन्होंने 1973 में पटना साइंस कॉलेज से बीएससी बॉटनी (ऑनर्स) की डिग्री के साथ स्नातक की डिग्री हासिल की थी. यही नहीं सुशील मोदी ने पटना विश्वविद्यालय में एमएससी वनस्पति विज्ञान पाठ्यक्रम में भी दाखिला लिया था, लेकिन जय प्रकाश नारायण द्वारा शुरू किए गए सामाजिक आंदोलन में शामिल होने के लिए पढाई को बीच में ही छोड़ दिया. फिर 13 अगस्त, 1986 को उन्होंने जेसी जॉर्ज से शादी की, वह मुंबई के रहने वाले एक ईसाई केरलवासी थीं. बताया जाता है कि सुशील और जेसी अपने शोध अध्ययन के दौरान सहपाठी थे…वो एक कॉलेज में बतौर प्रोफेसर कार्यरत हैं. इन दोनों के 2 बेटे हैं, जिनका नाम उत्कर्ष तथागत और अक्षय अमृतांशु है.
बता दें सुशील मोदी का राजनीतिक सफर पटना विश्वविद्यालय में एक छात्र कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ था. 1973 में वह पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के महासचिव बने, फिर 1974 में वे बिहार प्रदेश छात्र संघर्ष समिति के सदस्य बने और 1974 के प्रसिद्ध बिहार छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया. कहा जाता है कि जेपी आंदोलन और आपातकाल के दौरान सुशील मोदी को 5 बार गिरफ्तार किया गया था.
यहीं नहीं उन्होंने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में MISA अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी, जिसके परिणामस्वरूप MISA अधिनियम की धारा-9 को असंवैधानिक करार दिया गया. देश में आपातकाल/ इमरजेंसी लग जाने के बाद उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का राज्य सचिव नियुक्त किया गया था. 1977 से 1986 तक सुशील ABVP में विभिन्न नेतृत्व पदों पर कार्य किया. यहां अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बिहार और उत्तर प्रदेश की दूसरी भाषा के रूप में उर्दू की घोषणा के खिलाफ एक आंदोलन का नेतृत्व किया था.
सन् 1996 से 2004 तक सुशील मोदी बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे थे. फिर 2004 में ही वह भागलपुर लोकसभा सीट से सांसद बने और पहली बार सदन पहुंचे थे. इसके एक साल बाद यानि 2005 में बिहार में एनडीए की सरकार बनी और सुशील मोदी को विधानमंडल दल का नेता चुना गया. फिर उन्होंने बाद में सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया और वो बिहार के उपमुख्यमंत्री बन गए.
बता दें कि राजनीति में सुशील मोदी ही ऐसे सदस्य हैं जोकि लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद के रह चुके थे. वह 2010 में भी एनडीए की सरकार में बिहार में डिप्टी सीएम बने थे. हालांकि इसके बाद इन्हें राज्यसभा भेजा गया था और इस साल यानि 2024 में सुशील मोदी का कार्यकाल समाप्त हो गया था. इस बार के लोकसभा चुनाव में भूमिका नहीं निभाने की घोषणा करते वक्त उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल के जरिए ये भी बताया था कि वे कैंसर से पीड़ित हैं.
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