7th Pay Commission Latest News Today: चुनावी साल में पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार देशभर के तकनीकी संस्थानों के टीचिंग और नॉन-टीचिंग कर्मचारियों को बड़ा तोहफा देने जा रही है. मोदी सरकार ने इन कर्मचारियों को 7th Pay Commission यानी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ देने की घोषणा की है. केंद्र सरकार का यह फैसला देश के सभी तकनीकी संस्थानों के साथ-साथ राज्य सरकार के अधीन संचालित टेक्निकल इंस्टीट्यूट्स के कर्मचारियों पर भी लागू होगा. यानी इस निर्णय से न सिर्फ डिग्री लेवल तक की पढ़ाई कराने वाले केंद्रीय तकनीकी संस्थान के टीचिंग और नॉन-टीचिंग कर्मचारी लाभान्वित होंगे, बल्कि यह फैसला राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे संस्थानों के कर्मचारियों के लिए भी राहत भरा होगा. 7th Pay Commission का लाभ इन कर्मचारियों को दिए जाने से सरकार के राजस्व के ऊपर 1241.78 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा.

हमारी सहयोगी वेबसाइट डीएनए के अनुसार, केंद्र सरकार ने तकनीकी संस्थानों के कर्मचारियों को 7th Pay Commission का लाभ देने के अलावा यह निर्णय भी लिया है कि वह इन कर्मियों के एरियर यानी बकाया पैसे की 50 फीसदी राशि का भी भुगतान करेगी. ऐसे में जबकि अगले महीने के अंत तक लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने का देश इंतजार कर रहा है, तकनीकी संस्थानों के कर्मचारियों के लिए यह खबर राहत देने वाली है. क्योंकि केंद्र की मोदी सरकार के इस फैसले से न सिर्फ उनका वेतन बढ़ जाएगा, बल्कि सरकार के मुताबिक 1.1.2016 से 31.3.2019 के बीच राज्य सरकारें अपने अधीन संचालित तकनीकी संस्थानों के एरियर पर जितना खर्च करेंगी, केंद्र सरकार उसका 50 फीसदी संस्थानों को लौटा देगी.

देशभर के तकनीकी संस्थानों के टीचिंग और नॉन-टीचिंग कर्मचारियों को 7th Pay Commission का लाभ देने की घोषणा के बाद केंद्रीय कर्मचारियों को भी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ मिलने की राह खुलती नजर आ रही है. आपको बता दें कि केंद्र सरकार के अधीन संचालित होने वाले कई संस्थानों के कर्मचारी भी वर्षों से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं. आयोग की सिफारिशों को अगर पूरे देश में लागू किया गया तो कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी 18,000 रुपए महीने से बढ़कर 21,000 रुपए हो जाएगी. कर्मचारी संगठन सरकार पर लगातार इस बात के लिए दबाव बना रहे हैं कि उनकी मांगों के अनुरूप ही वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं. संगठनों का कहना है कि सरकार को कर्मचारियों के फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.68 गुना कर दिया जाना चाहिए.