
Tanuja Joshi
हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक... तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी ... और पढ़ें
8th Pay Commission Updates: 1 जनवरी 2026 से लागू होने वाले 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स में उत्सुकता तेज हो गई है. यूनियन कैबिनेट से आयोग को मंजूरी मिलने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी, महंगाई भत्ते (DA) में क्या बदलाव आएगा और एरियर कब तक मिल सकता है. फिलहाल आयोग की आधिकारिक सिफारिशें सामने नहीं आई हैं, लेकिन शुरुआती चर्चाओं और विशेषज्ञों के आकलन से एक मोटा अंदाजा लगाया जा रहा है. 8वां वेतन आयोग, 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहे 7वें वेतन आयोग की जगह लेगा और इसके तहत वेतन ढांचे, पेंशन और भत्तों की नए सिरे से समीक्षा होगी.
वेतन आयोग का काम सिर्फ बेसिक सैलरी बढ़ाना नहीं होता, बल्कि महंगाई और आर्थिक हालात के हिसाब से पूरे वेतन ढांचे को संतुलित करना होता है. इसमें विभिन्न भत्तों के साथ-साथ डीए को भी रिवाइज किया जाता है ताकि महंगाई का असर कर्मचारियों की आय पर कम पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन बढ़ोतरी किसी एक फैसले से तय नहीं होती, बल्कि इसके पीछे देश की आर्थिक स्थिति, सरकारी राजस्व और भविष्य की वित्तीय जिम्मेदारियां अहम भूमिका निभाती हैं. यही वजह है कि हर वेतन आयोग में बढ़ोतरी का प्रतिशत अलग-अलग रहा है.
अगर पिछले वेतन आयोगों के ट्रेंड देखें तो तस्वीर और साफ होती है. 6वें वेतन आयोग में औसतन करीब 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी मानी जाती है, जबकि 7वें वेतन आयोग में यह प्रभाव लगभग 23 से 25 फीसदी के बीच रहा. 7वें आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिसने सभी पे लेवल पर सैलरी तय करने में अहम भूमिका निभाई. फिटमेंट फैक्टर दरअसल एक गुणक होता है, जिसके जरिए मौजूदा बेसिक पे को नए वेतन में बदला जाता है.
8वें वेतन आयोग को लेकर शुरुआती अनुमान बताते हैं कि सैलरी में 20 से 35 फीसदी तक की बढ़ोतरी संभव हो सकती है. फिटमेंट फैक्टर 2.4 से 3.0 के बीच रहने की चर्चा है, खासकर एंट्री लेवल की बेसिक सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है. हालांकि, विशेषज्ञ यह भी साफ कर रहे हैं कि ये सिर्फ संभावनाएं हैं, अंतिम फैसला नहीं। आने वाले 12-18 महीनों में महंगाई की दर, सरकार की वित्तीय स्थिति, टैक्स कलेक्शन और राजनीतिक फैसले इस पर सीधा असर डालेंगे. एरियर को लेकर भी यही माना जा रहा है कि अगर लागू करने में देरी होती है तो कर्मचारियों को पिछली तारीख से बकाया भुगतान मिल सकता है, लेकिन इस पर अंतिम मुहर आयोग की सिफारिशों के बाद ही लगेगी.
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