Aadhar Card Latest Update: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आधार कार्ड (Aadhaar Card) के आधार की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है. कोरोना की वजह से कोर्ट ने खुले में विचार करने के बजाय चैंबर में सुनवाई की और फिर याचिकाएं खारिज कर दी.Also Read - सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आजम खान, कहा- जमानत की शर्त के तौर पर उनके विश्वविद्यालय को गिराया जा रहा है

कांग्रेस नेता जयराम रमेश समेत 7 लोगों ने दायर की थी पुनर्विचार याचिका
बता दें कि कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश समेत सात लोगों ने आधार कार्ड (Aadhaar Card) की संवैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पुनर्विचार याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस ए एमखानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस बीआर गवई की पांच सदस्यीय खंडपीठ ने 11 जनवरी को मामले की सुनवाई की. जिसका आदेश बुधवार को जारी कर दिया गया. Also Read - 'धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा है', ज्ञानवापी मामले में अब SC में नई याचिका

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने जताई आपत्ति Also Read - VHP का दावा, ज्ञानवापी में मिला कथित शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, कहा- हमारे पास काफी तथ्य

न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय एक संविधान पीठ ने 26 सितम्बर, 2018 के उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिकाओं को 4:1 के बहुमत के साथ खारिज कर दिया. जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ (Justice DY Chandrachud) ने बहुमत वाले इस फैसले से असहमति जताई और कहा कि समीक्षा याचिकाओं को तब तक लंबित रखा जाना चाहिए जब तक कि एक वृहद पीठ विधेयक को एक धन विधेयक के रूप प्रमाणित करने पर फैसला नहीं कर लेती.

जस्टिस चंद्रचूड ने आधार योजना को बताया जनता से धोखा
पीठ ने 4:1 के बहुमत के फैसले में आधार अधिनियम के कुछ विवादास्पद प्रावधानों को भी खारिज कर दिया था. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने हालांकि कहा था कि कल्याणकारी योजनाओं और सरकारी सब्सिडी की सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए आधार की आवश्यकता होगी. वहीं वर्ष 2018 में यह फैसला सुनाने वाली पांच न्यायाधीशों वाली पीठ में शामिल रहे न्यायमूर्ति चंद्रचूड ने बहुमत से इतर अपने फैसले में कहा था कि आधार (Aadhaar Card) विधेयक को धन विधेयक के रूप में पारित नहीं होना चाहिए था क्योंकि यह संविधान के साथ धोखे के समान है और निरस्त किए जाने के लायक है.

कोर्ट ने वर्ष 2018 में आधार को बताया था संवैधानिक
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018 में आधार (Aadhaar Card) योजना को संतुलित बताते हुये इसकी संवैधानिक वैधता बरकरार रखी थी. इसके साथ ही कोर्ट ने बैंक खातों, मोबाइल कनेक्शन और स्कूल में बच्चों के प्रवेश आदि के लिये इसकी अनिवार्यता संबंधी प्रावधान निरस्त कर दिए थे. याचिका इस आधार पर दायर की गई थी कि सरकार ने आधार विधेयक को धन विधेयक के रूप में प्रमाणित किया था. जिससे सरकार राज्यसभा में बहुमत की स्वीकृति प्राप्त किए बिना इस पारित कराने में समक्ष हो गई थी.