नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शनिवार को जब अपना दूसरा केंद्रीय बजट पेश करने के लिए उठेगी, तो उन्हें अपनी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का सामना करना पड़ेगा. एक ऐसा रोडमैप देना जिससे भारत को एक गहरी आर्थिक मंदी से बाहर निकालने और हाई ग्रोथ पर वापस लाने की उम्मीद होगी. उनके लिए ऐसा पहली बार नहीं होगा कि वह कठिन समय के दौरान उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ा हो. जब वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार में रक्षा मंत्री थी, तब उन पर भारतीय वायु सेना के जेट विमान और लड़ाकू विमान राफेल को लेकर सीतारमण की आलोचना हुई थी. उन पर विमान के अधिग्रहण में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ा था लेकिन अब उनके सामने दूसरी चुनोती है.

सितंबर तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि 4.5% दर्ज की गई, जो मार्च 2013 के बाद से सबसे धीमी रही और राजस्व संग्रह भी अनुमान से कम रहा. सीतारमण को अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कुछ योजनाओं पर काम करना होगा. इनमें निजी निवेश को किक-स्टार्ट करने के साथ जॉब के लिए नए अवसर खोलने होंगे. उन्हें राजकोषीय समेकन (fiscal consolidation) के रोडमैप के साथ काम करना पड़ेगा. निर्मला सीतारमण देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं. वह देश का दौरा कर रही हैं और विभिन्न ड्रेक धारकों से बात कर रही हैं, व्यापार और उद्योग निकायों के साथ-साथ आम लोगों से भी इनपुट ले रही हैं.

वहीं विशेषज्ञों का कहना कि सीतारमण के लिए यह काम आसान नहीं होगा क्योंकि कर राजस्व में कमी और खर्च के लिए सीमित गुंजाइश के कारण विकास का पुनरुद्धार जल्द ही होने की संभावना नहीं है. मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा कि वित्त मंत्री के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसे कर राजस्व में कमी के साथ अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करना होगा. एक वित्तीय फिसलन (इस वर्ष) अर्थव्यवस्था को उत्तेजित करने की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि एक और चुनौती यह है कि राज्यों का राजस्व भी नष्ट हो गया है. परिणामस्वरूप, खर्च के लिए सीमित राजकोषीय स्थान होगा.

जुलाई में अपने पहले बजट की घोषणा के बाद से सीतारमण को एक और अधिक कठिन काम का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें डी-ग्रोथ इंडस्ट्रियल आउटपुट, सिकुड़ते निर्यात और उच्च खुदरा मुद्रास्फीति जैसे प्रमुख मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतक खराब हो गए हैं. 5 जुलाई को एक महीने के बजट की घोषणा की गई थी, सरकार ने कुछ विवादास्पद उपायों को वापस ले लिया, जिनमें पूंजीगत लाभ पर लगाया गया सरचार्ज शामिल था. इसके बाद, उन्होंने दुनिया भर के व्यापार तनावों और अस्थिर कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ चुनौतियों का समाधान करने के लिए सेक्टर-विशिष्ट उपायों- निर्यातकों, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल क्षेत्र में घोषणा की थी. निवेशकों आकर्षित करने के लिए कॉर्पोरेट टैक्स में भी कटौती की गई थी.

वित्त मंत्री ने निवेशकों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए, जैसे करदाताओं द्वारा आयकर विभाग द्वारा उत्पीड़न से बचने के लिए, ई-मूल्यांकन की व्यवस्था करना और कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) से संबंधित कुछ प्रावधानों में ढील दिया गया. उन्होंने बैंकरों को आश्वासन दिया कि विवेकपूर्ण वाणिज्यिक निर्णय (Prudent commercial decision) में इन तीनों केंद्रीय एजेंसियां – केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के के उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान की जाएगी.