नई दिल्ली. वित्त मंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) ने स्पष्ट किया है कि सरकार को अपने राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) के लक्ष्य को पाने के लिए रिजर्व बैंक अथवा किसी अन्य संस्था से कोई अतिरिक्त धन नहीं चाहिए. हालांकि, जेटली ने कहा है कि रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के पूंजी ढांचे के लिए जो भी नई रूपरेखा बनेगी और उससे जो अतिरिक्त कोष प्राप्त होगा, उसका इस्तेमाल भविष्य की सरकारें आने वाले सालों में गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों में कर सकतीं हैं. वित्त मंत्री ने टीवी चैनल ‘टाइम्स नाउ’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘हमें अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पाने के लिए अन्य संस्थाओं से किसी तरह के अतिरिक्त धन की आवश्यकता नहीं है. मैं इसे स्पष्ट करना चाहता हूं कि सरकार की इस तरह की कोई मंशा नहीं है. हम यह भी नहीं कह रहे हैं कि अगले छह माह में हमें कुछ धन दीजिए. मुझे इसकी जरूरत नहीं है.’’Also Read - Cryptocurrency Bill 2021: कैबिनेट की मंजूरी के बाद संसद में आएगा क्रिप्टो बिल: वित्त मंत्री

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चालू वित्त वर्ष के बजट में भारत के राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.3 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा गया है. रिजर्व बैंक के कोष पर सरकार की नजर होने की बात को लेकर हो रही आलोचना पर जेटली ने कहा कि पूरी दुनिया में केन्द्रीय बैंक के पूंजी ढांचे की एक रूपरेखा तय होती है. इसमें केन्द्रीय बैंक द्वारा रखी जाने वाली आरक्षित राशि तय करने का प्रावधान किया जाता है. जेटली ने कहा, ‘‘हम केवल यही कह रहे हैं कि इस बारे में कुछ चर्चा होनी चाहिए, कुछ नियम होने चाहिए जिसके तहत रिजर्व बैंक के लिए पूंजी ढांचे की रूपरेखा तय हो.’’ उन्होंने कहा कि ऐसे में जो अधिशेष राशि होगी उसका इस्तेमाल भविष्य की सरकारें अगले कई वर्षों तक गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के लिए कर सकती हैं.

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रिजर्व बैंक के केन्द्रीय बोर्ड ने इस माह हुई अपनी बैठक में रिजर्व बैंक के आर्थिक पूंजी ढांचे की रूपरेखा (ईसीएफ) तय करने के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति बिठाने का फैसला किया है. यह समिति केन्द्रीय बैंक के पास रहने वाली आरक्षित पूंजी के उचित स्तर के बारे में सुझाव देगी. समझा जाता है कि रिजर्व बैंक के पास इस समय 9.59 लाख करोड़ रुपए का भारी भरकम कोष रखा है. रिजर्व बैंक की स्वायत्तता को लेकर पूछे गए सवाल पर जेटली ने कहा कि यह कानून के दायरे में ही होनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘सरकार का मानना है कि हम इसका सम्मान करते हैं और कानून में जो प्रावधान हैं उसके दायरे में रहते हुए स्वायत्तता को बनाए रखेंगे.’’ वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था के व्यापक हित में हम रिजर्व बैंक के समक्ष मुद्दों को उठाते रहेंगे. सरकार तथा केन्द्रीय बैंक के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए.

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संस्थागत असफलता से इनकार करते हुए कहा, ‘‘अर्थव्यवस्था के यदि कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां नकदी की कमी है या कर्ज नहीं मिल पा रहा है तो एक संप्रभु सरकार होने के नाते हम उन मुद्दों को उठाते रहेंगे जहां रिजर्व बेंक को उन पर निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है.’’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार के समय राजकोषीय घाटा जीडीपी के छह प्रतिशत तक पहुंच गया था. वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘हमें 4.6 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा विरासत में मिला. 1947 के बाद से आने वाले सरकारों में इस सरकार के पांच साल के कार्यकाल में राजकोषीय अनुशासन के मामले में सबसे बेहतर रिकार्ड रहा है. 4.6 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे को इस साल हम 3.3 प्रतिशत पर लाने वाले हैं.’’