नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की 22वीं बैठक सम्पन्न हुई. इस बैठक में कई बड़े फैसले हुए. इन फैसलों में कंपोजीशन स्कीम की लिमिट बढ़ाना, रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को मासिक के बजाए तिमाही आधार पर भरना अनिवार्य करना और कुछ वस्तुओं पर टैक्स की दरों को कम करना प्रमुखता से शामिल है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कांफ्रेंस में इन बातों की जानकारी दी. वित्त मंत्री ने कहा, ‘जीएसटी को लागू किए हुए लगभग तीन महीने पूरे हो गए हैं. पहले दो महीनों की रिटर्न भी फाइल हुई हैं. इसका अलग-अलग कारोबारों पर क्या असर है और लोगों के क्या अनुभव रहे हैं, इन मुद्दों पर इस बैठक में चर्चा हुई.’ हम आपको जीएसटी काउंसिल की 22वीं बैठक में की 10 प्रमुख बातें बताने जा रहे हैं.
काउंसिल ने कंपोजीशन स्कीम का फायदा लेने की सीमा को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए कर दिया है। पहले यह सीमा 75 लाख रुपए प्रस्तावित थी.
1 जुलाई को वस्तु एवं सेवा कर लागू होने के बाद GSTR-1, GSTR-2 और GSTR-3 फॉर्म हर महीने भरना होता था, लेकिन अब आपको ये ही तीनों फॉर्म तिमाही आधार पर भरने होंगे. हालांकि आपको टैक्स का भुगतान हर महीने करना होगा. ध्यान दें यह सुविधा 1.5 करोड़ तक के कारोबारियों के लिए ही है.
एक्पोर्टर की धनराशि ब्लॉक हो गई है. जिससे उसे पैसों की कमी का सामना करना पड़ रहा है. रिफंड की व्यवस्था सामान्य होने में कुछ समय लगेगा. 10 अक्टूबर से जुलाई और 18 अक्टूबर से अगस्त के महीने का रिफंड जांच कर एक्सपोर्टरों को चेक दे दिए जाएंगेय.
दीर्धकालीन समाधान के लिए हर एक्सपोर्टर ई-वालेट का बनेगा और एक निश्चित धनराशि उसे एडवांस रिफंड के लिए दी जाएगी. यह ई-वालेट अप्रेल 2018 तक दे दिया जाएगा.
जीएसटी के पैटर्न में कलेक्शन पैटर्न है उसमें जो बड़े करदाता हैं उनसे सबसे ज्यादा कर आया है. जो मध्यम और छोटे करदाता हैं उनकी तरफ से कम या शून्य टैक्स आया है. विस्तृत अध्ययन किया है इस बारे में. जो 94-95 फीसदी टैक्स जो बड़े करदाता से आता है उसका फ्लो बढ़ता रहे. जो मध्यम और छोटे करदाता है वे टैक्स स्लैव में आते रहें.
जीएसटी काउंसिल ने करीब 27 वस्तुओं पर कर की दरों में संशोधन किया है. इनमें आम, खाखरा, आयुर्वेदिक दवाएं, स्टेशनरी के कई सामान, हाथ से बने धागे, प्लेन चपाती, आईसीडीएस किड्स फूड पैकेट, अनब्रैंडेड नमकीन, अनब्रैंडेड आयुर्वेदिक दवाएं, डीजल इंजन के पार्ट्स, दरी (कारपेट), प्लास्टिक वेस्ट, रबर वेस्ट, पेपर वेस्ट, और मैन मेड यार्ड प्रमुखता से शामिल है.
एसी रेस्तरां पर टैक्स की दर को फिर से परखा जाएगा. ऐसे में एसी रेस्तरां में खाना खाना सस्ता हो सकता है क्योंकि काउंसिल के सदस्यों में इस पर लगने वाली जीएसटी दर को कम करने पर सहमति जता दी है. इस पर जीएसटी दर को घटाकर 12 फीसद किया जा सकता है जो कि मौजूदा समय में 18 फीसद है.
जीएसटी काउंसिल ने ज्वैलरी कारोबार को बड़ी राहत दे दी है. अब 50,000 रुपए से ऊपर की ज्वैलरी खरीदने पर न तो पैन कार्ड देना होगा और न ही अब इसकी जानकारी सरकार को देनी होगी.
सरकार ने रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म को मार्च 2018 तक स्थगित कर दिया गया है. इसके पीछे सरकार की यह दलील है कि अभी लोगों को इसे समझने में दिक्कतें आ रही हैं. वहीं ई-वे बिल को जनवरी से लागू किए जाने की कोशिश शुरू की जाएगी और मार्च-अप्रैल तक इसके पूरी तरह से लागू होने की उम्मीद है.
एक महत्वपूर्ण फैसला ये भी लिया गया कि जवाहरातों-गहनों और ऐसी ही दूसरी चीजों का व्यापार करने वाले जिनका टर्नओवर 2 करोड़ से ज्यादा का है, वे मनी लॉन्डरिंग एक्ट के तहत नहीं आएंगे.
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