नई दिल्ली: उद्योग संगठन एसोचैम का कहना है कि अकेले अमेरिका के साथ ही 150 अरब डॉलर का व्यापार घाटे के बावजूद भारत को उस वैश्विक व्यापार युद्ध में उलझने की जरूरत नहीं है, जो हाल के दिनों में विकसित देशों की संरक्षणवादी नीतियों के कारण सामने आ रहा है. इसकी वजह यह है कि देश का आयात अधिकांश अनिवार्य प्रकृति का है. एसोसिएटेड चेंबर्स आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्टील पर 25 फीसदी और अल्युमीनियम पर 10 फीसदी आयात शुल्क लगाने वाली अधिसूचना पर हस्ताक्षर के संदर्भ में यह बात कही है. Also Read - गुजरात में कोरोना का कहर: 65 हज़ार से अधिक हुई संक्रमितों की संख्या, मृतकों का आंकड़ा ढाई हज़ार पार

चाहते हुए भी भारत विरोध करने की स्थिति में नहीं
एसोचैम ने कहा कि ट्रंप कुछ और मदों पर भी आयात शुल्क लगाने की बात कही है, जिसका यूरोप, जापान और चीन विरोध कर सकते हैं. जहां तक भारत का सवाल है तो हम विरोध करना चाहें भी तो नहीं कर सकते, क्योंकि हम जिन वस्तुओं का आयात करते हैं वे हमारी अनिवार्य जरूरत हैं. ऐसे में जरूरत है कि किसी एक पक्ष से पूरी तरह जुड़ने के बजाए विशिष्ट व्यापारिक भागीदारों से द्विपक्षीय संपर्क बनाने का श्रेष्ठ रास्ता चुना जाए. विश्व व्यापार संगठन से भी संपर्क साधा जा सकता है,लेकिन यह रास्ता लंबा होता है, इसलिए द्विपक्षीय संपर्क बेहतर होगा.” Also Read - राम मंदिर भूमि पूजन: लालकृष्ण आडवाणी बोले- मेरा सौभाग्य है कि राम जन्मभूमि आंदोलन में महत्वपूर्ण दायित्व निभाने का मौका मिला

अमेरिका से भारत का आयात 450 अरब डॉलर
बड़े व्यापारिक घाटे के संदर्भ में उद्योग संगठन ने कहा कि अमेरिका से भारत का आयात 450 अरब डॉलर है, जबकि निर्यात सिर्फ 300 अरब डॉलर है. पूरे आयात बिल का करीब एक चैथाई कच्चा तेल व अन्य चीजों का है. एसोचैम ने कहा कि इसके अलावा प्लास्टिक और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं का भी भारत आयात करता है और इन वस्तुओं का तत्काल जरूरत के मुताबिक घरेलू उत्पादन करना मुश्किल है. Also Read - IPL 2020 को लेकर काफी मयंक अग्रवाल हैं काफी उत्‍साहित, बोले- खुद को रोक नहीं पा रहा हूं

1.15 अरब डॉलर काइस्पात भारत ने आयात किया
एसोचैम ने कहा किव्यापारिक जंग और आयात शुल्क के कारण भले ही हमारा निर्यात प्रभावित हो, लेकिन हम बड़े आयातक होने का बहुत ज्यादा धौंस नहीं दिखा सकते.” एसोचैम ने बताया कि इस्पात उत्पादन की क्षमता होने के बावजूद भारत ने इस साल फरवरी में पिछले साल के मुकाबले 21 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 1.15 अरब डॉलर इस्पात का आयात किया जबकि, गैर-लौह धातुओं का आयात फरवरी में पिछले साल के मुकाबले 33 फीसदी बढ़कर एक अरब डॉलर हो गया. उद्योग संगठन ने इस्पात के आयात में इजाफा होने पर चिंता जाहिर की. (इनपुट एजेंसी)