Ayushman Bharat Yojana Benefites Online: देश के गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने तमाम योजनाओं की शुरुआत की है. इसी में एक है आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojana). इस योजना के तहत देश के गरीब परिवारों का साल में पांच लाख रुपये के इलाज के लिेए स्वास्थ्य बीमा करवाया जाता है. मोदी सरकार की यह योजना काफी लोकप्रिय हुई है. इस योजना के तहत अब तक 12.5 करोड़ से अधिक ई-कार्ड जारी किए जा चुके हैं. आइए आपको बताते हैं कि इस योजना को लेकर क्या है ताजा अपडेट.Also Read - E-Shram Portal: सरकार आज लॉन्च करेगी ई-श्रम पोर्टल, जानिए- क्या होगा इसमें खास?

दरअसल, मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि सितंबर 2018 में आयुष्मान भारत योजना शुरू होने के बाद से अब तक 1.26 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को इस योजना के तहत मुफ्त उपचार मिला है. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि अभी तक 23,000 से अधिक अस्पतालों को पैनल में शामिल किया गया है और अब तक 12.5 करोड़ से अधिक ई-कार्ड जारी किए जा चुके हैं. Also Read - Ayushman Bharat Yojana: आयुष्मान भारत योजना के तहत हर माह अकाउंट में पहुंचेगे इतने हजार रूपए!

गौरतलब है कि Ayushman Bharat Yojana के तहत कोरोना के मरीजों का भी इलाज होता है. इसी साल मार्च महीने में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर कह दिया था कि आयुष्मान भारत योजना के तहत कोविड-19 का इलाज (Covid-19 treatment is covered under Ayushman Bharat) भी कवर किया जाएगा. ऐसे में कोरोना काल में भी बड़ी संख्या में गरीब तबके के लोगों ने इस योजना का लाभ लिया. हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने अभी तक इस बारे में कोई आंकड़ा जारी नहीं किया है. Also Read - पीएम मोदी के शासन काल में कश्मीर ने 1990 के बाद से सबसे शांतिपूर्ण अवधि को देखा : शाह

इसमें कहा गया है कि साथ ही, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत आवंटित कुल राशि का 57 प्रतिशत कैंसर, हृदय संबंधी बीमारियों, अस्थिरोग और नवजात शिशुओं के उपचार में उपयोग हुआ है.

बयान के अनुसार हर्षवर्धन ने योजना शुरू होने की दूसरी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ‘आरोग्य मंथन’ 2.0 की अध्यक्षता की. उन्होंने कहा, “इस योजना के तहत 15,500 करोड़ रुपये से अधिक का उपचार किया गया है. इसने करोड़ों जिंदगियों और घरों को तबाह होने से बचाया है. उपचार पर अधिक खर्च होने के कारण हर साल अनुमानित छह करोड़ परिवार गरीबी रेखा से नीचे चले जाते थे.”

बयान के अनुसार लाभार्थियों में लगभग आधी लड़कियां और महिलाएं हैं. बयान के अनुसार हर्षवर्धन ने कहा कि इन दो वर्षों में, योजना के तहत 1.26 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त उपचार प्रदान किया गया है.