नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि संसद से पारित कानून के जरिये मोबाइल फोन और बैंक खातों को आधार से जोड़ने की व्यवस्था को बहाल किया जा सकता है. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या सरकार इसके लिए नया कानून लाएगी. Also Read - Coronavirus: EMI भुगतान के SMS से कर्जदारों में तीन महीने की मोहलत को लेकर भ्रम

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या आधार को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया था. लेकिन दूरसंचार कंपनियों जैसी निजी इकाइयों को सत्यापन के लिए आधार का इस्तेमाल करने से रोक दिया था. जेटली ने कहा कि अदालत का फैसला काफी अच्छा फैसला है, क्योंकि न्यायालय ने स्वीकार किया है कि आधार के पीछे सरकार का उद्देश्य वैधानिक है. Also Read - कोरोना संकट के बीच बड़ी राहत, RBI ने तीन माह तक EMI नहीं देने का रास्ता साफ किया

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वित्त मंत्री ने एचटी लीडरशिप समिट में कहा, “आधार नागरिकता से जुड़ी पहचान नहीं है.” बल्कि यह एक व्यवस्था है. लोगों को विभिन्न सरकारी सहायता और सब्सिडी उपलब्ध कराने की एक प्रणाली होनी चाहिये. यही आधार का मुख्य उद्देश्य है.”

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जेटली ने कहा कि कोर्ट ने आधार के ज्यादातर उद्देश्यों को सही ठहराया है. आधार के जिन कामों को वैध नहीं ठहराया गया है, वह दो श्रेणियों में आते हैं. जिनमें से एक अनुरूपता का सिद्धांत है कि आधार इन मामलों में मदद करेगा और उसके बाद इसे उचित कानून के तहत किया जायेगा.

जेटली ने कहा, “सारा तर्क यह दिया जा है कि निजी कंपनियां इसका इस्तेमाल नहीं कर सकतींं हैं. इसमें धारा 57 है, जो यह कहती है कि आप दूसरों को कानूनी तरीके से या फिर अनुबंध के जरिए प्राधिकृत कर सकते हैं. जिसे निरस्त किया गया है वह अनुबंध के जरिये प्राधिकृत करने वाले हिस्से को निरस्त किया गया है.”

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जेटली ने कहा कि कानूनी प्रावधान से मोबाइल फोन और बैंकों खातों को आधार से जोड़ने की व्यवस्था को बहाल किया जा सकता है.हालांकि, जेटली ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस उद्देश्य के लिए सरकार की संसद में कानून में संशोधन की कोई योजना है. वित्त मंत्री ने कहा कि न्यायालय ने आयकर जैसे कई क्षेत्रों में आधार के इस्तेमाल की अनुमति दी है.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या आधार को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया था, लेकिन दूरसंचार कंपनियों जैसी निजी इकाइयों को सत्यापन के लिए आधार का इस्तेमाल करने से रोक दिया था. जेटली ने कहा कि अदालत का फैसला काफी अच्छा फैसला है, क्योंकि न्यायालय ने स्वीकार किया है कि आधार के पीछे सरकार का उद्देश्य वैधानिक है.

जेटली ने कहा, सारा तर्क यह दिया जा है कि निजी कंपनियां इसका इस्तेमाल नहीं कर सकतीं हैं. इसमें धारा 57 है, जो यह कहती है कि आप दूसरों को कानूनी तरीके से या फिर अनुबंध के जरिये प्राधिकृत कर सकते हैं. जिसे निरस्त किया गया है वह अनुबंध के जरिये प्राधिकृत करने वाले हिस्से को निरस्त किया गया है.

वित्त मंत्री ने एचटी लीडरशिप समिट में कहा, “आधार नागरिकता से जुड़ी पहचान नहीं है.” बल्कि यह एक व्यवस्था है. लोगों को विभिन्न सरकारी सहायता और सब्सिडी उपलब्ध कराने की एक प्रणाली होनी चाहिये. यही आधार का मुख्य उद्देश्य है.”

उन्होंने कहा कि न्यायालय ने आधार के ज्यादातर उद्देश्यों को सही ठहराया है. आधार के जिन कामों को वैध नहीं ठहराया गया है वह दो श्रेणियों में आते हैं. जिनमें से एक अनुरूपता का सिद्धांत है कि आधार इन मामलों में मदद करेगा और उसके बाद इसे उचित कानून के तहत किया जायेगा. हालांकि, जेटली ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस उद्देश्य के लिए सरकार की संसद में कानून में संशोधन की कोई योजना है. वित्त मंत्री ने कहा कि न्यायालय ने आयकर जैसे कई क्षेत्रों में आधार के इस्तेमाल की अनुमति दी है.