Bhim App और RuPay कार्ड का इस्तेमाल करने वालों के लिए जरूरी खबर है. दरअसल, कई जगहों पर Bhim App और RuPay कार्ड को स्वीकार नहीं किए जाने की खबरों के बीच केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने एक आदेश जारी किया है. इसके तहत 50 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाली और केवल कंपनियों के बीच (बी2बी) लेन-देन करने वाली इकाइयों के लिए ही RuPay कार्ड या Bhim ऐप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भुगतान स्वीकार करने की अनिवार्यता से छूट दी है. यानी दोनों स्थितियों को छोड़कर हर किसी को लेनदेन में Bhim App और RuPay कार्ड को स्वीकार करना होगा. खासकर खुदरा कारोबार में यह पूरी तरह से स्वीकार्य होगा. Also Read - PM मोदी ने यूएई में लॉन्च किया रुपे कार्ड, छप्पन भोग अबू धाबी आउटलेट से खरीदा लड्डू

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने एक परिपत्र में कहा, ‘‘यह स्पष्ट किया जाता है कि कानून की धारा 269एसयू उन व्यक्तियों पर लागू नहीं होगा जो केवल बी2बी सौदा करते हैं. यानी वे खुदरा ग्राहकों के साथ सौदा नहीं करते….बशर्ते ठीक पहले के वर्ष में उनकी 95 प्रतिशत सकल प्राप्ति नकदी के अतिरिक्त किसी अन्य माध्यम से हुई हो.’’ Also Read - अब एक ही कार्ड से ले सकेंगे बस या मेट्रो के टिकट, कर सकेंगे शॉपिंग, पीएम मोदी ने की शुरुआत

सरकार ने डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिये वित्त कानून, 2019 में नया प्रावधान धारा 269एसयू जोड़ा . इसके तहत अगर व्यक्ति कोई कारोबार कर रहा है और उसकी बिक्री/कारोबार/सकल प्राप्ति ठीक पिछले वर्ष में 50 करोड़ रुपये से अधिक है तो उसे अनिवार्य से भुगतान इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से स्वीकार करने की जरूरत थी. Also Read - भीम ऐप इस्तेमाल करने वालों को 14 अप्रैल से मिलेगा कैशबैक

इसी अनुसार दिसंबर 2019 में रूपे आधारित डेबिट कार्ड, यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) (भीम यूपीआई) और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस क्विक रिस्पांस कोड (यूपीआई) को अधिसूचित किया जिसके जरिये भुगतान स्वीकार किया जा सकता था.

सीबीडीटी ने कहा कि उसे इस बारे में सूचना दी गयी थी कि निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भुगतान की अनिवार्यता सामान्य तौर पर बी2सी (कंपनी से ग्रााहक के बीच) कंपनियों के लिये है जो सीधे खुदरा ग्रााहकों से सौदा करती हैं.

पुन: निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में प्रति लेन-देन या प्रतिदिन अधिकतम भुगतान सीमा है, ऐसे में यह बी2बी के लिये प्रासंगिक नहीं है. कंपनियों से कंपनियों बीच लेनदेन करने वाली यानी बी2बी इकाइयां आमतौर पर बड़ी राशि एनईएफटी या आरटीजीएस के जरिये प्राप्त करती हैं. सीबीडीटी ने कहा कि इस प्रकार कंपनियों के लिये भुगतान निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से स्वीकार करने की अनिवार्यता से प्रशासनिक असुविधा होगी और अतिरिक्त लागत वहन करना होगा.

(इनपुट भाषा)