नई दिल्ली: कर्ज के बोझ तले दबी देश की बड़ी कंपनी वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के समाधान पेशेवरों ने मंगलवार को कंपनी के संभावित खरीदारों से बोलियां आमंत्रित की हैं. कंपनी उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक से लेकर तेल एवं गैस क्षेत्र में कार्यरत है. राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) मुंबई, के आदेश के बाद वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ दिवालिया एवं रिण शोधन अक्षमता प्रक्रिया 6 जून 2018 को शुरू की गई. कंपनी पर विभिन्न बैंकों का 20,000 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज है.Also Read - Fact Check: खुद को दिवालिया घोषित करने के लिए OYO ने फाइल की याचिका, यहां जानें- क्या है इसकी सच्चाई?

संभावित बोलीदाताओं से कहा गया है कि वह 5 अक्टूबर 2018 से पहले अपनी बोली सौंप दें. वीडियोकॉन को उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए जाना जाता है. कंपनी ने बाद में तेल एवं गैस, डीटीएच और दूरसंचार क्षेत्र में भी कारोबार शुरू किया, लेकिन इनमें उसे असफलता मिली. Also Read - Videocon Loan Case: ICICI Bank की पूर्व CEO चंदा कोचर को मिली जमानत

बता दें कि आईसीआईसीआई बैंक के साथ 2012 में 3,250 करोड़ रुपए के लोन में कर्ज के लिए फायदा पहुंचाने के मामले में भी वीडियोकॉन समूह जांच के घेरे में है. इस मामले में बैंक की तत्कालीन प्रबंध निदेशक एवं सीईओ चंदा कोचर की भूमिका की भी जांच की जा रही है. Also Read - Chanda Kochar Latest News: चंदा कोचर को सुप्रीम कोर्ट से लगा झटका, फैसले के खिलाफ याचिका खारिज; जानें- क्या है पूरा मामला

एक सार्वजनिक घोषणा में वीडियोकॉन के समाधान पेशेवर अनुज जैन ने कहा कि वीडियोकॉन समूह की 11 और कंपनियों के मामले में रिण शोधन अक्षमता समाधान प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जबकि समूह की चार अन्य कंपनियों के लिए भी एनसीएलटी की ओर से जल्द आदेश पारित किया जाने वाला है. इस साल की शुरुआत में देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज और वीडियोकॉन टेलिकम्युनिकेशंस लिमिटेड के खिलाफ अलग से दिवालिया प्रक्रिया का मामला दायर किया था.

समाधान पेशेवरों ने वीडियोकॉन के अधिग्रहण के लिए बोली लगाने वालों के लिए जो मानदंड तय किए हैं उसके मुताबिक पिछले वित्त वर्ष में कंपनियों, व्यक्तियों अथवा निवेशकों के समूह की न्यूनतम एकीकृत नेटवर्थ 2,000 करोड़ रुपए होनी चाहिए. इसके साथ ही पिछले तीन वर्षों के दौरान किसी भी साल में समूह स्तर पर कुल कारोबार 1,000 करोड़ रुपए होना चाहिए.