नयी दिल्ली: शेयर बाजारों में जोरदार गिरावट के बीच मंगलवार को निवेशकों की बाजार हैसियत 2.55 लाख करोड़ रुपये ‘डूब’ गई. आर्थिक संकट और व्यापार युद्ध को लेकर चिंता के बीच निवेशकों की धारणा बुरी तरह प्रभावित हुई है. बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स मंगलवार को 769.88 अंक या 2.06 प्रतिशत के नुकसान से 36,562.91 अंक पर आ गया.

 

शेयर बाजारों में जोरदार गिरावट से मंगलवार को बंबई शेयर बाजार की सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 2,55,585.56 करोड़ रुपये घटकर 1,38,42,866.10 करोड़ रुपये रह गया. एक्सिस सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण ठुकराल ने कहा कि बाजार ने वाहन बिक्री के कमजोर आंकड़ों, जीडीपी की सुस्त रफ्तार पर प्रतिक्रिया दी है. इससे यह संकेत मिल रहा है कि अर्थव्यवस्था में सुस्ता गहरा गई है और मौद्रिक और वित्तीय मोर्चे पर तत्काल उपाय करने की जरूरत है. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 में नुकसान रहा. बीएसई में 1,613 शेयरों में गिरावट आई, जबकि 817 में लाभ रहा. 178 शेयर अपने पूर्वस्तर पर कायम रहे. मंगलवार को कारोबार के दौरान करीब 200 शेयरों अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर पर आ गए.

रुपये में भी तेज गिरावट
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर अप्रिय खबरों का सिलसिला जारी रहने से मंगलवार को शेयर बाजारों में जोरदार गिरावट आई. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दो प्रतिशत से अधिक टूट गए. वहीं अंतर बैंक विदेशी विनियम बाजार में रुपया भी 97 पैसे की गिरावट के साथ 72.39 प्रति डॉलर के अपने नौ माह के निचले स्तर पर आ गया. सेंसेक्स की कंपनियों में आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, वेदांता, एचडीएफसी, इंडसइंड बैंक, टाटा मोटर्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज और ओएनजीसी के शेयर 4.45 प्रतिशत तक गिर गये. रुपये में गिरावट के बीच दो आईटी कंपनियों टेकएम और एचसीएल टेक के शेयर मामूली लाभ के साथ बंद हुए. अंतर बैंक विदेशी विनिमय बाजार में मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 97 पैसे के नुकसान से 72.39 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ

इस कारण आई गिरावट
एमके वेल्थ मैनेजमेंट के शोध प्रमुख जोसफ थॉमस ने कहा कि पहली तिमाही के जीडीपी की वृद्धि दर पांच प्रतिशत पर आने और बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर सुस्त पड़ने से मुख्य रूप से बाजार में गिरावट आई. इसके अलावा नकारात्मक वैश्विक संकेतकों, अमेरिका चीन व्यापार युद्ध और दुनिया की अन्य अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती के रुख से भी धारणा प्रभावित हुई. थॉमस ने कहा कि रोजगार के निचले स्तर और वित्त की उपलब्धता नहीं होने से विशेषरूप से ग्रामीण इलाकों में कमजोर घरेलू खपत की स्थिति बनी है. इन मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है.

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयर भी टूटे
सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के दस बैंकों के एकीकरण की घोषणा की है. इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयर भी टूट गए. विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से निवेशकों में यह संदेश गया है कि सरकार न केवल बैंकों में नई पूंजी डाल रही है बल्कि वह उनके कामकाज संचालन में भी सुधार चाहती है. लेकिन फिर भी बैंकों का यह विलय बैंकों की भौगोलिक उपस्थिति और सांस्कृतिक विविधता को देखते हुये परेशान करन वाला लगता है. सरकार ने हालांकि, अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए कई कदम उठाए हैं लेकिन कमजोर वृहद आर्थिक आंकड़ों तथा अगस्त महीने में वाहन कंपनियों की बिक्री में दस प्रतिशत से अधिक की गिरावट से बाजार की धारणा प्रभावित हुई है.