नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज लोकसभा में वित्त वर्ष 2018-19 का आम बजट पेश किया. इस दौरान जेटली ने कहा कि कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.2 से 7.5 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है. जेटली ने इस बजट में किसानों और गरीब मध्यम वर्ग का खास ख्याल रखा है. किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की बात कही. इसी तरह 10 करोड़ गरीब परिवारों को स्वास्थ्य बीमा का ऐलान भी किया. Also Read - Budget 2021: सरकार को कृषि क्षेत्र के लिए ज्यादा पैसा और प्रोत्साहन देने की जरूरत

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बजट-2018-19 के दौरान कृषि क्षेत्र पर अपेक्षित जोर के अनुरूप, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने घोषित किया कि सभी कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) इस स्तर पर रखा जाएगा जिससे किसान को उत्पादन लागत से कम से कम डेढ़ गुना मुनाफा मिल सके. अगले वित्त वर्ष के लिए बजट पेश करते हुए जेटली ने कहा कि यह उपाय 2022 तक किसानों की आय दुगुना करने के सरकार के लक्ष्य को पूरा करने में काफी मदद देगा.

इसके अलावा वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार 2 हजार करोड़ की लागत से कृषि बाजार बनाएगी. किसान कर्ज के लिए 11 लाख करोड़ के फंड का ऐलान भी वित्त मंत्री ने किया. इसके आलावा 42 मेगा फूड पार्क बनाए जाएंगे. वित्त मंत्री ने किसानों के लिए नया ग्रामीण बाजार ई-मैन बनाने का ऐलान भी किया.

गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवा

बजट में वित्त मंत्री ने स्वास्थ्य सेक्टर के लिए भी बड़े एलान किए. जेटली ने कहा कि 5 लाख नए स्वास्थ्य केंद्र बनाए जाएंगे. इसके आलावा 10 करोड़ गरीब परिवारों को 5 लाख सालाना मेडिकल बीमा दिया जाएगा. वित्त मंत्री ने कहा कि देश भर में 24 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों खोले जाएंगे.

इसके अलावा टीवी के मरीज को सरकार की तरफ से हर महीने 500 रुपए दिए जाएंगे. सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत 6 करोड़ शौचालयों का निर्माण भी कराएगी. जेटली ने कहा कि सरकार का उद्देश्य 2 करोड़ टॉयलेट और बनाने की है.

शिक्षा:

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शिक्षा क्षेत्र में भी बड़े एलान किए. वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार प्री नर्सरी से लेकर 12वीं क्लास तक एक ही पॉलिसी रखना चाहती है जिससे शिक्षा के क्षेत्र में विकास हो सके. इसके आलावा आदिवासी छात्रों के लिए बनेंगे एकलव्य विद्यालय बनाए जाएंगे. 24 नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे.

मोदी सरकार प्रधानमंत्री रिसर्च फेलो स्कीम शुरू करेगी. इस स्कीम के तहत 1000 बीटेक छात्रों को चुना जाएगा और उन्हें आईआईटी से पीएचडी करने का अवसर दिया जाएगा. 13 लाख से ज्यादा शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी. वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि इंस्टिट्यूट्स ऑफ एमिनेंस स्थापित करने की योजना भी है. वहीं, जेटली ने रेलवे विश्वविद्यालय स्थापित करने का ऐलान भी किया. यह विश्वविद्यालय गुजरात के शहर वडोदरा में स्थापित होगा.

रेलवे:

वित्त मंत्री ने कहा कि रेलवे को 2018-19 के लिए 1,48,528 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. इसके आलावा वित्त वर्ष 2018-19 में सरकार 18,000 किलोमीटर रेललाइनों का दोहरीकरण करेगी. वहीं, मुंबई लोकल का दायरा बढ़ने के लिए 40,000 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. स्टेशनों को आधुनिक बनाया जाएगा और उन पर  वाईफाई और सीसीटीवी लगाए जाएंगे.

मोबाइल फोन पर सीमा शुल्क बढ़ा:

घरेलू स्मार्टफोन निर्माताओं की मदद के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को मोबाइल फोन पर सीमा शुल्क 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया. जेटली ने आम बजट पेश करने के दौरान कहा, “मोबाइल फोन के पुर्जो के आयात पर सीमा शुल्क मौजूदा 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है. इससे भारत के स्मार्टफोन क्षेत्र में नौकरियों में वृद्धि होगी.

आयकर में राहत नहीं

नौकरी करने वालों को को बजट में मायूसी हाथ लगी है. सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है. टैक्स छूट सीमा 2.5 लाख रुपए ही होगी. वरिष्ठ नागरिकों को जमा राशि पर ब्याज आय में 50 हजार तक छूट मिलेगी.

मौजूदा टैक्स स्लैब

0-2.5 लाख रुपए तक कोई टैक्स नहीं
2.5-5 लाख रुपए तक 5% टैक्स
5-10 लाख रुपए तक 20% टैक्स
10 लाख रुपए से ऊपर 30% टैक्स

वरिष्ठ नागरिकों के लिए जीवन बीमा निगम द्वारा संचालित ‘प्रधानमंत्री वय वंदन योजना’ में निवेश करने की सीमा 7.5 लाख रुपये से दोगुना बढ़ाकर 15 लाख रुपये की गई है.

सरकार ने 250 करोड़ टर्नओवर वाली कंपनियों को  कॉर्पोरेट टैक्स में भारी छूट दी गई है. 250 करोड़ रुपए तक टर्नओवर वाली कंपनियों को 25 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स देना है.  इससे पहले 50 करोड़ सालाना टर्नओवर वाली कंपनियों को 25 प्रतिशत टैक्स देना होता था. इससे स्टार्टअप इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी योजनाओं को फायदा मिलेगा.

राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति का वेतन बढ़ेगा

राष्ट्रपति को 5 लाख रुपये, उपराष्ट्पति को 4 लाख रुपये और राज्यपालों को 3.5 लाख रुपये वेतन दिया जाएगा. सांसदों के वेतन, भत्ते तय करने के नियमों में बदलाव होगा, मुद्रास्फीति से जुड़ेगे, हर पांच साल में स्वत: संशोधन का नियम बनेगा.