नई दिल्ली. मोदी 2.0 सरकार का पूर्ण बजट (Budget 2019) आगामी 5 जुलाई को संसद में पेश किया जाने वाला है. वित्त मंत्रालय इसकी तैयारियां शुरू कर चुका है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसको लेकर लगातार बैठकें कर रही हैं. बजट की सुगबुगाहट के साथ एक बार फिर इनकम टैक्स में छूट देने की चर्चा होने लगी है. प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में दोबारा लौटने वाली पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार के इस बजट से आम आदमी को काफी उम्मीदें हैं. लोगों को उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव में जनता का मूड देखते हुए केंद्र सरकार आयकर छूट की सीमा को बढ़ाने पर विचार कर सकती है. वहीं आर्थिक मामलों के जानकार भी इन रियायतों की सिफारिश कर रहे हैं. इन विशेषज्ञों का कहना है कि आयकर छूट की सीमा बढ़ाने से न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि इससे बाजार में उपभोग को भी बढ़ावा मिलेगा.

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बजट को लेकर आम आदमी के मन में कैसी-कैसी उम्मीदें हैं या उनके क्या विचार या सुझाव हैं, इस मामले पर सरकार हर बार जनता से राय लेती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2019 को लेकर भी आम जनता से राय मांगी है. सरकार ने आगामी पूर्ण बजट 2019-20 के लिए आम लोगों से सुझाव आमंत्रित किए हैं. यह सुझाव 20 जून तक भेजे जा सकते हैं. लोग अपने सुझाव सरकारी वेबसाइट ‘ माईजीओवी डॉट इन (mygov.in) पर दे सकते हैं. केंद्रीय बजट बनाने की प्रक्रिया को आम लोगों को भागीदार बनाने के लिए , वित्त मंत्रालय नागरिकों से सुझाव मांगे हैं.

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आपको बता दें कि मोदी सरकार के पूर्ण बजट पेश करने की प्रक्रिया में आर्थिक विशेषज्ञों की भारी-भरकम टीम इन दिनों काम कर रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बजट टीम में वित्त राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर, मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन शामिल हैं. आधिकारिक टीम के अगुवा वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग हैं. इसमें वित्त सचिव गिरीश चंद्र मुर्मू, राजस्व सचिव अजय भूषण पांडेय, दीपम के सचिव अतनु चक्रवर्ती और वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार शामिल हैं. बजट बनाने की प्रक्रिया के बीच आर्थिक विशेषज्ञों ने सरकार से कहा है कि आम आदमी को राहत देने का निर्णय लेते हुए आयकर छूट की सीमा में बढ़ोतरी की जानी चाहिए.

बजट के जानकारों का कहना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को आयकर से छूट की सीमा बढ़ाकर कम से कम तीन लाख रुपए तथा कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर से छूट देनी चाहिए. यह उपभोग तथा आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है. आयकर छूट की सीमा बढ़ाने के मामले पर पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर एंड लीडर (निजी कर) कुलदीप कुमार ने कहा, ‘‘भारत वैश्विक आर्थिक परिस्थिति से अप्रभावित नहीं रह सकता है और घरेलू स्तर पर भी चुनौतियां हैं. ऐसे में आम आदमी को बजट से काफी उम्मीदें हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘सरकार आधारभूत छूट की सीमा अभी के ढाई लाख रुपए से बढ़ाकर तीन लाख रुपए कर सकती है. इसके अलावा पांच प्रतिशत कर श्रेणी की सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपए से साढ़े सात लाख रुपए कर सकती है.’’

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कानून कंपनी लक्ष्मीकुमारन एंड श्रीधरन में पार्टनर एस वासुदेवन ने कहा कि आयकर अधिनियम में कुछ प्रावधानों पर पुन: गौर किया जाना चाहिए. उदाहरण के लिए कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर से छूट दी जानी चाहिए. टैक्समैन के डीजीएम नवीन वाधवा ने कहा कि पहली एनडीए सरकार ने अपने पहले बजट में 2014 में कर से छूट का दायरा बढ़ाया, लेकिन बाद में करदाताओं को अधिक लाभ नहीं दिया गया.

(इनपुट – एजेंसी)

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