नई दिल्ली: सरकार ने शनिवार को करदाताओं (टैक्स पेयर) के लिए नई कर व्यवस्था पेश की है. इसके तहत, 15 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले उन करदाताओं को कम दर पर आयकर देना होगा जो पुरानी व्यवस्था के तहत मिल रही छूट और कटौतियों का त्याग कर देंगे. नए वैकल्पिक कर ढांचे में 30 प्रतिशत की उच्चतम दर 15 लाख रुपये से अधिक की आय पर लागू होती है जबकि पहले से चल रहे ढांचे में 10 लाख रुपये से अधिक की आय 30 प्रतिशत की कर दर के तहत आती है.Also Read - सैलरी से 375 गुना अधिक है इस अफसर की संपत्ति, जांच कर रही विजिलेंस के भी उड़े होश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में अपना दूसरा बजट पेश करने के दौरान कहा कि नई आयकर व्यवस्था वैकल्पिक है और करदाता चाहे तो छूट और कटौती के साथ पुरानी कर व्यवस्था में रह सकते हैं. यह ध्यान रखने की जरूरत है कि एक बार नई कर व्यवस्था को चुनने के बाद यह व्यवस्था आगामी वर्षों में भी लागू रहेगी. सीतारमण ने कहा कि पांच लाख रुपये तक की सालाना आय वाले करदाताओं को पुरानी या नई दोनों कर ढांचे में कोई कर नहीं देना होगा. Also Read - Income Tax Saving: 80C के अलावा भी हैं टैक्स बचाने के विकल्प, यहां जानें अन्य पांच तरीके

उन्होंने अपने बजट भाषण में कहा, “व्यक्तिगत करदाताओं को राहत देने और आयकर कानून को सरल बनाने के लिए मैं एक नई और सरल व्यक्तिगत आयकर व्यवस्था का प्रस्ताव कर रही हूं. इसमें छूट और कटौतियों को छोड़ देने वाले करदाताओं को कम दर पर कर देना होगा.” नई कर व्यवस्था के तहत, 2.5 लाख रुपये तक की आय कर मुक्त रहेगी. 2.5 से पांच लाख तक की आय पर पांच प्रतिशत की दर से कर लगेगा, लेकिन 12,500 रुपये की राहत बने रहने से इस सीमा तक की आय पर कोई कर नहीं लगेगा. Also Read - हीरो मोटरकॉर्प के प्रमोटर पवन मुंजाल के घर और दफ्तर पर IT की रेड, करीबियों के ठिकानों को भी खंगाला गया

पांच से साढ़े सात लाख रुपये तक की आय पर 10 प्रतिशत, साढ़े सात से 10 लाख रुपये तक की आय पर 15 प्रतिशत, 10-12.5 लाख रुपये तक की आय पर 20 प्रतिशत और 12.5 से 15 लाख रुपये तक की आय पर 25 प्रतिशत की दर से आयकर का प्रस्ताव है. पंद्रह लाख रुपये से ऊपर की आय पर 30 प्रतिशत की दर से आयकर लगेगा.

अनुमान है कि नई कर दरों से सरकारी खजाने को सालाना 40 हजार करोड़ रुपये के राजस्व से वंचित होना पड़ेगा. वित्त मंत्री ने कहा कि पुरानी कर व्यवस्था में छूट और कटौतियों की करीब 100 व्यवस्थाएं हैं. नई सरल कर व्यवस्था में 70 तरह की छूट और कटौतियों को हटाने का प्रस्ताव है. आगे चलकर शेष बची छूट और कटौती पर समीक्षा और जांच-पड़ताल की जाएगी.

उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि यदि सालाना 15 लाख रुपये कमाने वाला व्यक्ति पुराने कर व्यवस्था में 2,73,000 रुपये कर के रूप में देता है जबकि नई कर व्यवस्था में बिना किसी छूट के उसे 1,95,000 रुपये का भुगतान करना होगा. इससे उसके कर के बोझ में 78,000 रुपये की कमी आएगी.

नई कर व्यवस्था में कुछ कटौतियों को हटाने का प्रस्ताव किया गया है. इनमें आवास भत्ता (एचआरए), मानक कटौती, आयकर अधिनियम की धारा 80 के तहत (बीमा प्रीमियम, भविष्य निधि एवं कई पेंशन योजनाओं में योगदान) मिलने वाली छूट शामिल है.

नई कर व्यवस्था इस प्रकार है

0-2.5 लाख रुपये तक —- कर मुक्त

2.5-5 लाख तक ——– 5 प्रतिशत

5 से 7.50 लाख तक—— 10 प्रतिशत

7.5 से 10 लाख तक—— 15 प्रतिशत

10 से 12.5 लाख तक—– 20 प्रतिशत

12.5 से 15 लाख तक—– 25 प्रतिशत

15 लाख रुपये से ऊपर की आय पर —- 30 प्रतिशत

पुरानी कर व्यवस्था इस प्रकार—

0-2.5 लाख रुपये तक —- कर मुक्त

2.5-5 लाख तक ——– 5 प्रतिशत

5 से 10 लाख तक —— 20 प्रतिशत

10 लाख रुपये से ऊपर- 30 प्रतिशत

(इनपुट भाषा)