Budget 2021: कोरोना महामारी के कारण चौपट हुई अर्थव्यवस्था (Economy) को पटरी पर लाने के लिए बजट (Budget 2021) में किस तरह के प्रावधान किए जाते हैं, इसको लेकर लोगों में बहुत अधिक उत्सुकता है. सरकार आगामी बजट में ऐसे कौन से प्रस्ताव लेकर आ रही है जिससे अर्थव्यवस्था जल्दी से पटरी पर आने लगे और आम आदमी को भी फायदा मिले.Also Read - IMF ने 2022 में भारत की वृद्धि दर का अनुमान 9 प्रतिशत किया, चीन 4.8%, यूएस 4% फीसदी पर रहेंगे

पिछले कुछ दिनों से मीडिया में आई रिपोर्ट्स से ये संकेत मिल रहे हैं कि सरकार आगामी बजट में कुछ आयकर लाभों की घोषणा कर सकती है क्योंकि इससे मांग बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी. लेकिन, इस पर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आयकर में छूट देने से ही खपत नहीं बढ़ाई जा सकती है और खपत नहीं बढ़ेगी तो मांग बढ़ने का सवाल ही नहीं उठता है. इसके लिए सरकार को लोगों के खर्च करने की क्षमता पर ध्यान देना होगा. यानी सरकार को सीधे तौर पर लोगों के जेब में पैसे पहुंचाने की जरूरत है. Also Read - Budget 2022: सैलरीड क्लास और मध्यम वर्ग के लोगों की मांग, बुनियादी छूट की सीमा बढ़ाए सरकार

महामारी (COVID-19) से चौपट हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार को मांग बढ़ाने पर जोर देना होगा. जिसको लेकर सरकार के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं. सरकार का उद्देश्य आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और भारत को मांग तके संकट से बाहर निकालना है. हालांकि, पिछले कुछ महीनों में आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है, लेकिन, अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिन्हें तत्काल सरकारी सहायता की आवश्यकता है. Also Read - 'तीसरी लहर के बावजूद मजबूत हुई भारत की समग्र आर्थिक गतिविधि'

आयकर में छूट देने मात्र से ही नहीं बढे़गी मांग, करने होंगे और उपाय

पिछले कुछ दिनों में, मीडिया में इस बात की जोरदार चर्चा हो रही है कि सरकार मांग बढ़ाने के लिए आगामी बजट में आयकर में लाभ देने की घोषणा कर सकती है. हालांकि, शीर्ष अर्थशास्त्रियों का मानना है कि टैक्स में छूट के लाभ से मांग को बढ़ावा नहीं मिल सकता है, क्योंकि टैक्स लाभ देने मात्र से खपत नहीं बढ़ सकती है और जब तक खपत नहीं बढ़ेगी तब तक मांग नहीं बढ़ सकती है.

हालांकि आयकर का लाभ देने से नागरिकों की व्यक्तिगत आय बढ़ सकती है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार के इस तरह के कदम से आर्थिक सुधार में मदद नहीं मिल सकती है, क्योंकि इस कदम मात्र से ही मांग नहीं बढ़ सकती है. खासकरके, ऐसे समय में जब सरकार के राजस्व में गिरावट आई है और आर्थिक विकास के दृष्टिकोण को लेकर अभी भी अस्पष्टता बनी हुई है.

दून विश्वविद्यालय, देहरादून में अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो एचसी पुरोहित का मानना है कि सरकार मांग बढ़ाने के लिए दो तरह के कदम उठा सकती है. सरकार पहले यह सोच सकती है कि जिनके पास पहले से जॉब है उनको और लाभ देकर उनके खर्च करने की क्षमता बढ़ाई जाए. दूसरा यह कि ज्यादा से ज्यादा जॉब क्रिएट किया जाए, क्योंकि जब लोगों के पास पैसे आएंगे तो अवधारणा के मुताबिक वे खर्च भी करेंगे और जब खर्च करेंगे खपत बढ़ेगी, जिससे मांग स्वयं बढ़ेगी. इस तरह से अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आने लगेगी.

आर्थिक मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार कमल शर्मा का कहना है कि सरकार को आयकर की सीमा बढ़ाने के साथ-साथ मार्केट में जॉब क्रिएशन और कारोबार पर भी ध्यान देना होगा. उनका कहना है कि कोरोना महामारी की वजह से लोगों को बहुत अधिक नुकसान उठाना पड़ा है. कितने लोगों की सैलरी कम कर दी गई है. न जाने कितने कल कारखाने बंद पड़े हैं. कइयों की नौकरी चली गई है, तो सरकार को इन सब बातों पर ध्यान देना होगा. सरकार अगर बहुत अधिक नहीं कर सकती है तो कम से कम प्री कोविड-19 के लेवल पर लाने का प्रयास जरूर करे. ताकि लोगों के जेब में पैसे आएं जिससे उनकी खर्च करने की क्षमता बढ़े.

इसके साथ-साथ सरकार को निर्यात को भी बढ़ाने के बारे में सोचना होगा और कारोबारियों को भी सहूलियतें देनी पड़ेंगी, क्योंकि कोरोना महामारी के दौरान कारोबारियों को बहुत अधिक नुकसान उठाना पड़ा है. कमल शर्मा कहते हैं कि महामारी आने का सबसे ज्यादा नुकसान मध्यम वर्ग को हुआ है. इसके साथ-साथ निचले तबके के लोगों को नुकसान उठाना पड़ा. उनकी नौकरियां चली गईं. छोटे और मझोले कारोबारियों का धंधा चौपट हो गया, तो सरकार को इस वर्ग पर ध्यान होगा. जिससे कम से कम कोरोना काल के पहले जैसी स्थिति बहाल की जा सके. ताकि लोगों के जीवन स्तर में सुधार आए.