Budget 2021: वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 1 फरवरी को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) द्वारा पेश किया जाएगा. 1 फरवरी को पेश किया जाने वाला यह बजट एनडीए सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह तीसरा बजट (Budget) होगा. कोरोना महामारी (COVID-19) और उसके बाद उपजे आर्थिक संकट के कारण यह बजट काफी महत्वपूर्ण है. बजट में अगले वित्त वर्ष में सरकार द्वारा किए जाने वाले खर्च के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली घोषणाएं की जाएंगी और उसके लिए प्रावधान भी बताए जाएंगे.Also Read - WPI Inflation: दिसंबर में थोक महंगाई घटकर 13.56% पर पहुंची, ईंधन की कीमतें घटने से कम हुई WPI

बजट को आसानी से समझने के लिए इसके कुछ शब्दों के बारे में जानना जरूरी है. बजट में ऐसे कई शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, जो किसी को भी आसानी से समझने में कठिनाई होती है. बजट में प्रयोग किए जाने वाले शब्दों को आसानी से समझने के लिए आइए जानते हैं कि बजट क्या है? Also Read - Retail Inflation: खाद्य पदार्थो की ऊंची कीमतों से दिसंबर में बढ़ी महंगाई, RBI के निर्धारित लक्ष्य के करीब पहुंची

बजट (Budget) क्या होता है? Also Read - Retail Inflation: रसोई का सामान महंगा होने से दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 5.59 प्रतिशत पर

केंद्र सरकार के खातों का विवरण बजट है. यह वित्तीय तथ्यों और आंकड़ों की एक अनुमानित प्रस्तुति है, जिसमें अनुमानित तौर पर साल में मिलने वाली रसीदें और खर्च करने की योजनाएं शामिल हैं. इसमें पिछले साल के दौरान किए गए असल प्रदर्शन का भी विवरण दिया जाता है.

जानिए- क्या होता है वित्त वर्ष (Financial Year)

वित्त वर्ष (Financial Year) वह साल होता है जो वित्तीय मामलों में हिसाब का आधार होता है. इसे सरकारों द्वारा लेखांकन और बजट उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाने वाली अवधि भी कहा जाता है. व्यापार और अन्य संगठनों द्वारा वित्तीय रिपोर्टिंग के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.

जानिए- क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey)

यह वित्त मंत्रालय द्वारा अर्थव्यवस्था की स्थिति पर सरकारी दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए तैयार किया जाता है. संसद में आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) के दस्तावेज पेश किए जाने के बाद बजट पेश किया जाता है.

जानें- क्या है राजकोषीय नीति (Fiscal Policy)

राजकोषीय नीति (Fiscal Policy) बजट के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है. यह सरकार के खर्च और कराधान यानी टैक्सेशन का एक अनुमान है. इसका इस्तेमाल सरकार द्वारा रोजगार वृद्धि, महंगाई को संभालने और मौद्रिक भंडार के प्रबंधन जैसे विभिन्न साधनों को लागू करने और नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है.

क्या है राजकोषीय या वित्तीय घाटा (Fiscal Deficit)

सरकार को प्राप्त होने वाले राजस्व के कम रहने और खर्च ज्यादा होने की स्थिति को राजकोषीय या वित्तीय घाटा (Fiscal Deficit) कहा जाता है. किसी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए कुछ राजकोषीय घाटे को बुरा नहीं माना जाता है. जैसे अगर घाटा किसी देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 4 फीसदी की सीमा में हो. अगर कुल राजस्व प्राप्तियों और कुल खर्च के बीच का अंतर सकारात्मक है तो इसे राजकोषीय अधिशेष कहा जाता है.

महंगाई (Inflation)

विभिन्न आर्थिक कारकों की वजह से वस्तुओं और सेवाओं की कीमत में सामान्य वृद्धि होना महंगाई (Inflation) है. इसकी वजह से एक समयावधि में मुद्रा की क्रय शक्ति में कमी आती है. इसे प्रतिशत के रूप में दर्शाया जाता है.

प्रत्यक्ष कर (Direct Tax)

किसी भी व्यक्ति और संस्थानों की आय और उसके स्रोत पर इनकम टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स, कैपिटल गेन टैक्स और इनहेरिटेंस टैक्स, डायरेक्ट टैक्स के अंतर्गत आते हैं.

अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax)

इनडायरेक्ट टैक्स (Indirect Tax) उत्पादित वस्तुओं और आयात-निर्यात वाले सामानों पर उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क और सेवा शुल्‍क के जरिए लगता है. इनडायरेक्ट टैक्सेज (Indirect Tax) को जीएसटी में समाहित कर दिया गया है.

चालू खाता घाटा (Current Account Deficit)

यह देश के व्यापार परिदृश्य को संदर्भित करता है. अगर निर्यात अधिक है और आयात के जरिए देश से बाहर जाने वाले पैसे से अधिक पैसा देश में आता है तो स्थिति अनुकूल है और इसे चालू खाता अधिशेष के रूप में जाना जाता है. लेकिन अगर आयात के जरिए देश से बाहर जाने वाला पैसा, निर्यात के एवज में आने वाले पैसे से ज्यादा है तो इसे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) कहते हैं.

उत्पाद शुल्क (Excise Duty)

देश की सीमा के भीतर बनने वाले सभी उत्पादों पर लगने वाले टैक्‍स को एक्‍साइज ड्यूटी (Excise Duty) कहते हैं. एक्‍साइज ड्यूटी को भी जीएसटी में शामिल कर लिया गया है.

सीमा शुल्क (Custom Duty)

सीमा शुल्क (Custom Duty) उन वस्तुओं पर लगाया जाता है, जो देश में आयात (Import) की जाती हैं या फिर देश के बाहर निर्यात (Export) की जाती हैं.