Budget 2022: सरकारी खातों की कितनी श्रेणियां होती हैं, जानें- बजट फ्रीज होने से पहले किसके साथ होती है चर्चा?

Budget 2022: बजट तैयार किए जाने के बाद और फ्रीज किए जाने से पहले प्रधानमंत्री के पास चर्चा के लिए जाता है. पीएम की सहमति के बाद उसे अंतिम रूप दिया जाता है.

Published: December 9, 2021 2:31 PM IST

By India.com Hindi News Desk | Edited by Manoj Yadav

Budget 2022: सरकारी खातों की कितनी श्रेणियां होती हैं, जानें- बजट फ्रीज होने से पहले किसके साथ होती है चर्चा?
(Symbolic Image)

Budget 2022: वित्त मंत्रालय के तहत, आर्थिक मामलों के विभाग का बजट प्रभाग नोडल निकाय है जो केंद्रीय बजट के निर्माण के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है. केंद्रीय बजट एक परामर्शी प्रक्रिया के माध्यम से बनाया जाता है जिसमें वित्त मंत्रालय, सरकारी नियोजन निकाय- नीति आयोग और कई खर्च करने वाले मंत्रालय शामिल होते हैं. बजट फ्रीज होने से पहले सभी प्रस्तावों पर प्रधानमंत्री के साथ चर्चा होती है.

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सरकारी खातों की तीन प्रमुख श्रेणियां हैं:

समेकित निधि:

अनुच्छेद 266(1) के अंतर्गत संचित निधि वह होती है जिसे सामान्यतः बजट कहा जाता है. इसमें सरकार द्वारा प्राप्त सभी राजस्व, सरकार द्वारा दिए गए ऋणों की वसूली से सभी प्राप्तियां और सरकार द्वारा उठाए गए नए ऋणों की पूरी राशि शामिल है. इस संचित निधि से सरकार का समस्त व्यय वहन किया जाता है. और, सरकार संसद की अनुमति के बिना इसमें से कोई राशि नहीं निकाल सकती है.

आकस्मिकता कोष:

आकस्मिकता कोष भारत के संविधान के अनुच्छेद 267 के तहत गठित किया गया है और यह 500 करोड़ रुपये का कोष है जो भारत के राष्ट्रपति के निपटान में है. यह तत्काल या अप्रत्याशित व्यय के लिए है जिसके लिए समेकित निधि के विपरीत पूर्व विधायी अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है.

हालांकि, सरकार को इस तरह के खर्च को बाद में संसद द्वारा अनुमोदित करवाना होगा. इसके अलावा, संसद की मंजूरी के साथ, सरकार को समेकित निधि (आकस्मिक निधि से व्यय की राशि के बराबर) से धन निकालने और आकस्मिक निधि को फिर से भरने की आवश्यकता है.

लोक लेखा:

लोक लेखा का गठन भारत के संविधान के अनुच्छेद 266(1) के तहत किया गया था. सरकार की सामान्य प्राप्तियों और व्यय के अलावा कुछ लेन-देन, जो समेकित निधि में रिपोर्ट किए जाते हैं, सरकारी खातों में दर्ज होते हैं. इन अन्य लेन-देनों के मामले में सरकार बैंकर के रूप में अधिक कार्य करती है, उदाहरण के लिए, भविष्य निधि, लघु बचत संग्रह, अन्य जमा, आदि. ऐसे लेनदेन से प्राप्त धन को सार्वजनिक खाते में रखा जाता है और संबंधित संवितरण भी वहीं से किया जाता है.

लोक खाते में रखी गई निधियां सरकार की नहीं होती हैं, और सरकार को इस धन को किसी समय उन व्यक्तियों और प्राधिकारियों को वापस करने की आवश्यकता होती है जिन्होंने इसे जमा किया था. इसलिए, लोक खाते से भुगतान के लिए संसदीय प्राधिकरण की आवश्यकता नहीं है.

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Published Date: December 9, 2021 2:31 PM IST