सरकार ने बुधवार को राजस्व हिस्सेदारी के आधार पर कोयले के वाणिज्यिक खनन और उसकी बिक्री के तौर-तरीकों को मंजूरी दे दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में यह निर्णय किया गया.

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘सीसीईए ने कोयला और लिग्नाइट की बिक्री राजस्व हिस्सेदारी आधार पर करने के लिये कोयला और लिग्नाइट खदान/ब्लाक की नीलामी प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है. साथ ही कोकिंग कोल संपर्क सुविधा अवधि बढ़ाने को भी मंजूरी दी है.’’

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले सप्ताह वित्तीय पैकेज की घोषणा करते हुए कहा था कि स्थानीय उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता समाप्त करने के लिये वाणिज्यिक खनन के लिये कोयला खानों की निजी क्षेत्र को नीलामी की जाएगी.

विज्ञप्ति के अनुसार सीसीईए की इस संबंध में मंजूर की गई प्रक्रिया में कहा गया है कि बोली मानदंड राजस्व हिस्सेदारी होगा. बोलीदाताओं को राजस्व में सरकारी को दी जाने वाली हिस्सेदारी के लिये प्रतिशत में बोली लगानी होगी.

इसमें कहा गया है, ‘‘न्यूनतम मूल्य राजस्व में 4 प्रतिशत हिस्सेदारी का होगा. बोलियां 10 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी तक 0.5 प्रतिशत के गुणक में स्वीकार की जाएगी. उसके बाद बोलियां 0.25 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी के गुणक में स्वीकार की जाएंगी.’’ कोयला खदान से निकले कोयले की बिक्री या उपयोग को लेकर कोइ पाबंदी नहीं होगी.