Cairn Energy: केयर्न एनर्जी ने भारत सरकार के खिलाफ एक टैक्स विवाद के मुददमें में जीत हासिल की है. पिछले कुछ समय में नरेंद्र मोदी सरकार को यह दूसरा झटका लगा है. इससे पहले भारत सरकार टैक्स विवाद मामले में ही वोडाफोन ग्रुप PLC से एक केस हार चुकी है. Also Read - WPI Inflation: दिसंबर में घटी थोक महंगाई, खाने-पीने के सामानों के दाम हुए कम

इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने केयर्न एनर्जी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा है कि 1.2 अरब डॉलर टैक्स की मांग जायज नहीं है. Also Read - PM Kisan Samman Yojna: इस योजना के तहत 20 लाख अपात्रों को मिल गए 1,364 करोड़ रुपये, देखिए- कहीं आपका नाम भी तो नहीं शामिल

अंग्रेजी अखबार मिंट में प्रकाशित खबर के मुताबिक, इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर यह जानकारी दी है. ट्रिब्यूनल ने भारत सरकार को यह भी कहा है कि कंपनी का जो फंड सरकार के पास है वह ब्याज सहित कंपनी को वापस किया जाए. Also Read - Onion Import: प्याज आयात के नियमों में ढील की समय सीमा 31 जनवरी तक बढ़ी, भाव कम होने के आसार

बता दें, भारत सरकार ने केयर्न इंडिया का टैक्स रिफंड रोक रखा है. इसके साथ ही डिविडेंड जब्त कर लिया है और बकाया टैक्स के भुगतान के लिए कुछ शेयर बिक्री भी किए हैं.

अब इस फैसले के बाद सरकार को यह रकम सूद सहित स्कॉटलैंड की ऑयल एक्सप्लोरर कंपनी को चुकाना होगा. हालांकि भारत सरकार के पास इस मामले में अपील के रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं.

गौरतलब है कि टैक्स मामले में केयर्न एनर्जी की यह जीत अंतरराष्ट्रीय मुकदमेबाजी में भारत की दूसरी हार है. इससे पहले वोडाफोन भी भारत के खिलाफ टैक्स विवाद का केस जीत चुकी है. इससे पहले वोडाफोन के साथ टैक्स विवाद मामले में ही एक साल तक चले केस का सितंबर में आया जिसमें भारत सरकार को हार का सामना करना पड़ा था.

क्या था मामला?

भारत सरकार वोडाफोन से 3 अरब डॉलर टैक्स की डिमांड कर रही थी जो इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन में खाली हो गया. भारत सरकार ने 2012 के बजट में रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स लागू किया था. जिसके तहत 1962 के बाद अगर कंपनी की संपत्ति भारत में है तो किसी भी M&A पर टैक्स देना अनिवार्य कर दिया गया .