नई दिल्लीः व्यापारियों के संगठन कनफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने ई-कॉमर्स कंपनियों अमेजन और फ्लिपकार्ट पर बाजार बिगाड़ने वाली कीमत के जरिये प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है. दोनों कंपनियों ने इन आरोपों को खारिज किया है. उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने शुक्रवार को बैठक बुलाई थी. इस बैठक में ही कैट ने यह आरोप लगाया. बैठक में फ्लिपकार्ट और अमेजन के प्रतिनिधि भी मौजूद थे.

कैट के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने कहा, ‘‘हम बैठक के नतीजों से संतुष्ट नहीं हैं. हमने अमेजन और फ्लिपकार्ट दोनों द्वारा सरकार की एफडीआई नीति की विशिष्टता और उसके उल्लंघन , पोर्टल पर बेचे जाने वाले माल को नियंत्रित करने, लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचने , गहरी छूट आदि से संबंधित विभिन्न सबूत रखे.’’

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उन्होंने कहा कि दोनों पोर्टलों ने सभी आरोपों का खंडन किया और कहा कि वे पूरी तरह एफडीआई नीति का पालन करते हैं. भारी छूट पर दोनों पोर्टल्स ने कहा कि वे छूट नहीं दे रहे हैं और यह ब्रांड हैं जो छूट प्रदान करते हैं. खंडेलवाल ने कहा कि कैट पूरे मामले को एक बार फिर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के समक्ष रखेगा और अमेजन और फ्लिपकार्ट दोनों के कारोबारी मॉडल की जांच की मांग करेगा.

इस बीच, कैट जल्द ही दिल्ली में एक सम्मेलन आयोजित करेगा और सभी ब्रांडों को अपना रुख बताने के लिए आमंत्रित करेगा. कैट ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है कि कौन छूट दे रहा है, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए और यदि ब्रांड इतनी बड़ी छूट दे रहे हैं, तो ऑफलाइन व्यापारी उन ब्रांडों का बहिष्कार करेंगे और देश भर में उनके उत्पाद को नहीं बेचेंगे.

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फ्लिपकार्ट के कॉरपोरेट मामलों के मुख्य अधिकारी रजनीश कुमार ने कहा कि उन्होंने बैठक में यह रेखांकित किया कि एक मार्केटप्लेस के रूप में कंपनी विक्रेताओं और कारीगरों को देशभर में उपभोक्ताओं से जोड़ रही है. हम भारत में सही तरीके से कारोबार करने को प्रतिबद्ध हैं. अमेजन इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि हमने कैट के साथ पारदर्शी परिचर्चा शुरू की है. हमने कैट के व्यापारियों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने और देश-विदेश के उपभोक्ताओं तक पहुंचने में मदद की पेशकश की है.