चेन्नई: पीएनबी घोटाले के सामने आने के बाद देश में आए रोज नए-नए वित्‍तीय घोटाले सामने आ रहे हैं. केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एक कंपनी और उसके चेयरमैन पर एक कंपनी पर 30 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा करने मामला दर्ज किया है. मिली जानकारी के मुताबिक, सीबीआई) ने डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड (डीसीएचएल) और उसके अध्यक्ष टी. वेंकटरम रेड्डी पर बीमा कंपनी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस लिमिटेड (यूआईआईसी) को 30.54 करोड़ रुपए का फर्जी नुकसान दिखाने के आरोप में मामला दर्ज किया है. Also Read - क्रिश्चियन मिशेल की बढ़ी मुश्किलें, दिल्ली की अदालक ने ईडी को पूछताछ के लिए दी इजाजत

एफआईआर में ये है रिपोर्ट
सीबीआई ने गुरुवार को दर्ज प्राथमिकी में मुंबई की निजी कंपनियां सीएआरई रेटिंग कार्ड तथा इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट फाइनेंस कोर्पोरेशन लिमिटेड तथा यूआईआईसी के दो पूर्व अधिकारियों को भी नामजद किया है. सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक, बालासुब्रमन्यम और कुंजिलवार ने चेन्नई तथा अन्य स्थानों पर यूआईआईसी को ठगने के लिए आपराधिक षड्यंत्र रचा तथा अपने पद का दुरुपयोग  किया.

3,755.70 करोड़ की कर्जदार कंपनी को जारी हुआ ऋणपत्र
प्राथमिकी के अनुसार प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा मान्यता प्राप्त रेटिंग एजेंसी सीएआरई रेटिंग लिमिटेड द्वारा दी गई रेटिंग के आधार पर निवेश किए गए थे. ऋणपत्र जारी होने के समय डीसीएचएल पर कुल ऋण 3,755.70 करोड़ रुपए था. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2011 में जुलाई से अक्टूबर के बीच कुंजिलवार द्वारा 10 करोड़ रुपए के तीन ऋणपत्र जारी किए गए, जिनमें प्रत्येक में 11.25 फीसदी असुरक्षित परिवर्तनीय ऋणपत्र थे.

एक साल में रेटिंग डी स्‍तर पर पहुंची
प्राथमिकी के अनुसार यूआईआईसी की निवेश कमेटी की नजरों से बचने के लिए तीन अलग-अलग अवसरों पर निवेश किए गए. साल 2011 में निवेश के समय सीएआरई रेटिंग लिमिटेड ने ‘पीआर1 प्लस’ रेटिंग दी, जबकि मात्र एक साल बाद साल 2012 में ऋणमुक्ति के समय रेटिंग बहुत बुरे स्तर ‘डी’ पर पहुंच गई.

30 करोड़ के फर्जी चेक जारी किए
प्राथमिकी के अनुसार साल 2012 में डीसीएचएल ने ब्याज सहित ऋण अदा नहीं किया. डीसीएचएल ने 10-10 करोड़ के तीन चेक जारी किए, जो फर्जी थे. इसके बाद यूआईआईसी ने डीसीएचएल के खिलाफ मामला दर्ज कर दिया जो अभी अदालत में लंबित है. (इनपुट-एजेंसी)