नई दिल्ली: आईसीआईसीआई बैंक की ओर से कराई गई स्वतंत्र जांच में बैंक की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चंदा कोचर को बैंक की आचार संहिता का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया है. न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी एन श्रीकृष्णा की समिति ने बुधवार को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी. रिपोर्ट में कहा गया है कि कोचर के स्तर पर वार्षिक खुलासों की जांच-पड़ताल में ढिलाई बरती गई और आचार संहिता का उल्लंघन किया गया. रिपोर्ट के आधार पर बैंक के निदेशक मंडल ने बैंक की आंतरिक नीतियों के तहत कोचर के इस्तीफे को उनकी ‘गलतियों पर बर्खास्तगी’ के तौर लेने का फैसला किया है.

बता दें कि सीबीआई ने कहा था कि आईसीआईसीआई बैंक मामले में पिछले हफ्ते ली गई तलाशी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच – पड़ताल के बाद संदिग्धों को पूछताछ के लिए बुलाएगी. मामले में निजी क्षेत्र के इस बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर भी शामिल हैं. अधिकारियों ने बीते सोमवार को यह जानकारी दी थी. सीबीआई वीडियोकॉन ग्रुप और चंदा कोचर के पति दीपक कोचर द्वारा संचालित नुपावर रीन्यूएबल्स एवं सुप्रीम इनर्जी के कार्यालयों में तलाशी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच कर रही है.

यह आरोप है कि चंदा कोचर के कार्यकाल के दौरान 1,875 करोड़ रुपए के छह लोन वीडियोकॉन ग्रुप और उसकी सहायक कंपनियों को मंजूर किए गए थे. इनमें से दो मामलों में वह खुद आवंटन समितियों में शामिल थीं. सीबीआई ने अपनी प्राथमिकी में बैंक उद्योग के कुछ दिग्गज लोगों को भी नामजद किया है, जिनमें आईसीआईसीआई बैंक के मौजूदा सीईओ संदीप बख्शी भी शामिल हैं. उन पर आरोप है कि वे भी आवंटन समिति के सदस्य थे और उनकी भूमिका की जांच किए जाने की जरूरत है.

प्राथमिकी के मुताबिक न्यू डेवलपमेंट बैंक (ब्रिक्स देशों का बैंक) के अध्यक्ष के. वी. कामथ, गोल्डमैन सैश इंडिया के अध्यक्ष संजय चटर्जी, स्टैंडर्ड चार्टर्ड के सीईओ जरीन दारूवाला, टाटा कैपिटल के प्रमुख राजीव सभरवाल और टाटा कैपिटल के वरिष्ठ सलाहकार होमी खुसरोखान की भूमिका की जांच किए जाने की जरूरत है. सीबीआई ने साल भर की शुरूआती जांच (पीई) के बाद उनके नाम प्राथमिकी में शामिल किए थे.