Chanakya Niti In Hindi: आचार्य चाणक्य (Chanakya) एक ऐसी महान विभूति थे, जिन्होंने अपनी विद्वता-बुद्धिमता और क्षमता के बल पर भारतीय इतिहास की धारा को बदल दिया. मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चाणक्य कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में भी विश्वविख्‍यात हुए.

सदियां गुजर जाने के बाद आज भी यदि चाणक्य द्वारा बताए गए सिद्धांत और नीतियां प्रासंगिक हैं, तो महज इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने गहन अध्‍ययन, चिंतन और जीवन के अनुभवों से अर्जित अमूल्य ज्ञान को, पूरी तरह नि:स्वार्थ होकर मानवीय कल्याण के उद्‍देश्य से अभिव्यक्त किया.

चाणक्य नीति (Chanakya Niti) द्वारा मित्र-भेद से लेकर दुश्मन तक की पहचान, पति-परायण तथा चरित्र हीन स्त्रियों में विभेद, राजा का कर्तव्य और जनता के अधिकारों तथा वर्ण व्यवस्था का उचित निदान हो जाता है.

जो व्यक्ति शास्त्रों के सूत्रों का अभ्यास करके ज्ञान ग्रहण करेगा उसे अत्यंत वैभवशाली कर्तव्य के सिद्धांत ज्ञात होंगे. उसे इस बात का पता चलेगा कि किन बातों का अनुसरण करना चाहिए और किनका नहीं. उसे अच्छाई और बुराई का भी ज्ञान होगा और अंततः उसे सर्वोत्तम का भी ज्ञान होगा.

आचार्य चाणक्य के मुताबिक धन का संचय है कितना जरूरी?

आचार्य चाणक्य बताते हैं कि भविष्य में आने वाली मुसीबतों के लिए धन एकत्रित करना बहुत जरूरी है और किसी भी व्यक्ति को यह नहीं सोचना चाहिए कि धनवान व्यक्ति को मुसीबत नहीं आती है. जब धन साथ छोड़ने लगता है तो संगठित तरीके से एकत्रित किया गया धन भी तेजी से घटता है.

साथ ही आचार्य चाणक्य कहते हैं कि कभी किसी ऐसी जगह पर नहीं बसना चाहिए, जहां पर आपकी कोई ईज्जत नहीं हो, जहां आपके रोजगार के लिए कोई साधन नहीं हो. जहां आपका कोई मित्र नहीं हो और जहां आप कोई ज्ञान आर्जित नहीं कर पाएं.

चाणक्य के मुताबिक, ऐसी जगह पर एक दिन भी न रहे, जहां पर ये पांच लोग नहीं हों:-

  • कोई अमीर व्यक्ति
  • ब्राह्मण, जो वैदिक शास्त्रों का ज्ञाता हो
  • राजा
  • नदी
  • चिकित्सक

बुद्धिमान व्यक्ति को ऐसे देश में कभी नहीं जाना चाहिए जहां पर रोजगार कमाने का कोई साधन न हो (Where is no source of earning), जहां लोगों को किसी बात का भय न हो, जहां लोगो को किसी बात की लज्जा न हो, जहां लोग बुद्धिमान न हों, और जहां लोगो की वृत्ति दान धर्म करने की नहीं हो.

आचार्य चाणक्य के अनमोल बचन (Anmol Bachan)

आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya) कहते हैं कि जैसे एक बछड़ा हज़ारो गायों के झुंड मे अपनी मां के ही पीछे चलता है. उसी तरह से आदमी के अच्छे और बुरे कर्म उसके पीछे चलते हैं.