Co-operative Banks in UP: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में करीब 60 लाख से अधिक किसानों ने 22,307.01 करोड़ रुपए का अल्पकालीन ऋण सहकारी बैंको से लिया है. राज्य के सीमांत एवं छोटे किसानों को साहूकारों के आर्थिक शोषण से मुक्त कराने के लिए सरकार के प्रयासों का असर दिखने लगा हैं. अब ग्रामीण साहूकारों के बजाए सहकारी बैंकों से ऋण लेने को प्राथमिकता देने लगे हैं. इसे देखते हुए लगता है कि ये बैंक अब ग्रामीणों का सहारा बन चुके हैं. सहकारी बैंकों के जरिए सहकारिता विभाग के आंकड़ों से यह सच्चाई सामने आयी है.Also Read - Omicron के खतरे के बीच यूपी सरकार ने जारी किया विदेशी और घरेलू हवाई यात्र‍ियों के लिए प्रोटोकॉल

वर्ष 2017-18 से अब तक हर वर्ष सहकारी बैंकों से ऋण लेने किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही हैं. वर्ष 2017-18 में 14.18 लाख किसानों ने सहकारी बैंकों से ऋण लिया था. वहीं वर्ष 2020-21 में 17.95 किसानों ने सहकारी बैंकों से ऋण लिया है. सूबे में आसानी से ऋण मिलने के चलते ग्रामीण इलाकों के युवा नए नए कारोबार करने की हिम्मत करने लग गए हैं. Also Read - 11 करोड़ की लागत से रामगंगा नदी पर बना 2 किमी लंबा पुल धराशायी हो दो टुकड़ों में बंट गया

सहकारिता विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य के हर गांव में ग्रामीणों को सहकारिता का लाभ पहुंचाने में जुटी प्रदेश सरकार ने बैंकिंग का जाल बिछाकर युवाओं और किसानों को साहूकारों के चंगुल से बाहर निकाला है. इसके तहत प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए आसानी से सस्ता ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था हो गई. Also Read - Weather News Upadte: IMD का अलर्ट, कल रात से कहां होगी बर्फबारी, देश के किन राज्‍यों में होगी बारिश

सूबे के किसानों को ऋण प्राप्त करने के लिए दर-दर भटकना ना पड़े, इसका भी प्रबंध किया गया. सरकार के ऐसे प्रयासों से अब ग्रामीणों को गांव में ही सीधे ऋण मिल रहा है. सहकारी बैंकों की शाखाएं, एटीएम और मोबाइल एटीएम वैन ऋण उपलब्ध कराने में किसानों का सहारा बनी हैं. किसानों के दरवाजे तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंची हैं और सीबीएस प्रणाली, एसएमएस एलर्ट जैसे अन्य अत्याधुनिक सेवाएं भी गांव में प्रत्येक व्यक्ति को मिलने लगी हैं.

इस व्यवस्था के तहत 14.18 लाख किसानों को वर्ष 2017-18 में 3908.04 करोड़ रुपए का अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराया गया. इसी प्रकार वर्ष 2018-19 में 15.45 लाख किसानों को 5163.17 करोड़ रुपए, वर्ष 2019-20 में 16.75 लाख किसानों को 6150.21 करोड़ रुपए और साल 2020-21 में 17.95 लाख किसानों को 7085.59 करोड़ रुपए का अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराया गया.

सहकारिता विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2017-18 से अब तक कुल 64.33 लाख किसानों को 22,307.01 करोड़ रुपए अल्पकालीन ऋण के रूप में उपलब्ध कराए गए हैं और यह अब भी सिलसिला जारी है. किसानों को उपलब्ध कराए गये इस ऋण के चलते अब ग्रामीण खेती के लिये कृषि यंत्र तथा कृषि उपज बढ़ाने के लिये खाद और बीज आसानी से खरीद पा रहे हैं.

ग्रामीणों को ऋण आसानी से मिले इसके लिए प्रदेश कोआपरेटिव बैंक की ओर से जिला स्तर पर तथा 50 जिला सहकारी बैंकों की 1260 शाखाओं और 7479 प्रारंभिक कृषि सहकारी ऋण समिति (पैक्स) किसानों की मददगार की भूमिका में हैं. उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की ओर से किसानों को कृषि यंत्रीकरण, पशुपालन, भूमि सुधार के लिए 323 शाखाओं के माध्यम से दीर्घकालीन ऋण वितरित किया जा रहा है.

इस व्यवस्था के तहत किसानों को अधिक लाभ पहुंचाने के लिये उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक की 27 शाखाएं और 50 जिला सहकारी बैंकों की 1260 शाखाएं सीबीएस प्रणाली का लाभ दे रही हैं. इसके माध्यम से किसानों को रुपे कार्ड, रुपे केसीसी, एसएमएस एलर्ट, सीटीएस अलर्ट, सीटीएस, ईसीएस क्रेडिट और डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफार्मर की सुविधा दी जा रही है. इसके अलावा ग्रामीणों को बैंकिंग की सेवाओं का लाभ देने के लिये 22 जिला सहकारी बैंकों की शाखाओं द्वारा 142 एटीएम का संचालन किया जा रहा है.

(With IANS Inputs)