कोरोना (Corona) की दूसरी लहर का अर्थव्यवस्था (Economy) पर काफी खराब असर हो रहा है. आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती की वजह से भारत में नये रोजगार के सृजन की गति धीमी पड़ने लगी है.Also Read - राजस्थान में चुनाव की तैयारियों में जुटी AAP को झटका! पार्टी के कार्यक्रम नहीं जुटे कार्यकर्ता

फरवरी के महीने के कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के आंकड़ों में बताया गया था कि औपचारिक कार्यबल में शामिल होने वाले नये कर्मचारियों की संख्या तीन महीनों में सबसे कम रही. Also Read - आईपीएल 2022 प्लेऑफ में बारिश का साया, अगर नहीं हुआ मैच तो सिर्फ सुपर ओवर से होगा विजेता का फैसला

अनंतिम आंकड़ों से पता चला है कि फरवरी में कम से कम 7,56,067 नये कर्मचारी शामिल हुए, जो जनवरी 2021 में 8,61,074 नए ईपीएफ ग्राहकों की तुलना में 1 लाख से अधिक थे. Also Read - आईएसएसएफ जूनियर वर्ल्‍ड कप: भारत की जीत पर मनु भाकर बोलीं- CWG 2022 से शूटिंग को क्‍यों किया गया बाहर?

पेरोल डेटा ने संकेत दिया कि जनवरी से फरवरी में नए परिवर्धन में लगभग आधी गिरावट 18-25 की आयु वर्ग में थी. यह एक संकेत है कि युवा पेशेवरों को रोजगार मिलने की गति धीमी पड़ गई है.

वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में कोविद -19 की दूसरी लहर के कारण रोजगार की स्थिति और खराब हो सकती है, क्योंकि देश के अधिकांश राज्यों में सख्त प्रतिबंध लगा दिए गए हैं.

अर्थशास्त्री और ब्रोकरेज हाउस पहले ही कह चुके हैं कि दूसरी लहर के दौरान सख्त प्रतिबंधों ने आर्थिक गतिविधियों को बुरी तरह बाधित किया है और इसका नये रोजगार सृजन पर सीधा असर पड़ेगा.

हालांकि, ईपीएफओ डेटा भारत में जॉब मार्केट का सर्व-समावेशी संकेतक नहीं है. असंगठित क्षेत्र में रोजगार में भारी गिरावट की संभावना है, क्योंकि कई प्रवासी मजदूर सख्त लॉकडाउन और आय की हानि के डर से अपने-अपने घरों को लौटने लगे हैं.

बढ़ने लगी है बेरोजगारी

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी, मुंबई स्थित एक थिंक टैंक द्वारा जारी हालिया आंकड़ों में बताया गया है कि तेजी से बढ़ रहे कोविड -19 के मामलों और प्रतिबंधों के कारण देश में बेरोजगारी फिर से बढ़ने लगी है.

सीएमआईई द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 11 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में बेरोजगारी की दर 8.6 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जो इसके पहले के दो सप्ताह में 6.7 प्रतिशत थी.

यदि राज्यों को दैनिक मामलों में तेज वृद्धि को रोकने के लिए सख्त लॉकडाउन लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा तो बेरोजगारी की दर अगले महीने तक और बढ़ने की संभावना है.

कोरोना की दूसरी लहर का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

विशेषज्ञों ने पहले कोरोना की दूसरी लहर का अर्थव्यवस्था पर सीमित प्रभाव पड़ने की संभावना जताई थी, लेकिन अगर भारत मई के अंत तक घातक वायरस के प्रसार को रोकने में विफल रहता है, तो स्थिति काफी चिंताजनक हो सकती है.

ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा था कि पूरे भारतीय राज्यों में गतिशीलता प्रतिबंधों के कारण व्यावसायिक गतिविधि फिर से शुरू होने की गति में भारी गिरावट आई है.

नोमुरा की रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल के दूसरे हफ्ते से ही भारत में कारोबारी गतिविधियां घटने लगी हैं और आर्थिक स्थिति खराब हो सकती है.