नई दिल्ली: रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा कि घातक कोरोनावायरस (सीओवीआईडी-19) के लंबे समय तक प्रकोप का असर भारतीय उद्योग पर पड़ेगा, जिसे गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ेगा. क्रिसिल ने एक रिपोर्ट में कहा कि सीओवीआईडी-19 का इस वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही में इंडिया इंक के सेक्टरों में मिला-जुला असर रहेगा. रिपोर्ट में जिक्र किया गया कि सेक्टर जैसे ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मा बल्क ड्रग्स व एग्रो केमिकल्स कुछ हद तक सीओवीआईडी-19 का सामना कर सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया, “हालांकि, इनवेंट्ररीज के ठहरने से उद्योग पर खासा दबाव पड़ेगा.” रिपोर्ट के अनुसार, अगर आपूर्ति में व्यवधान जैसे ऑटोमेटिव कंपोनेंट्स, नवीकरणीय (सोलर) व हीरा में मार्च से आगे जाता है तो चुनिंदा क्षेत्रों में फर्मों के क्रेडिट प्रोफाइल भी प्रभावित हो सकते हैं. Also Read - खाली स्‍टेडियम में IPL कराना चाहते हैं पैट कमिंस, ऐसा करने से कुछ हद तक लौटेगी सामान्‍य स्थिति

रिपोर्ट में कहा गया, “हीरा और ऑटोमोटिव कंपोनेंट क्षेत्र दोनों पहले से ही एक वर्ष से अधिक समय से सुस्त बने हुए हैं. इसके साथ ही ऑटोमोटिव सेक्टर 1 अप्रैल, 2020 से प्रभावी होने वाले बीएस-छह रेग्युलेशन को अपनाने वाला है. इसकी वजह से कंपोनेंट व वाहनों के दाम ज्यादा होने वाले हैं.” यही नहीं कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते भारत से चीन को रूई और धागे का निर्यात ठप पड़ गया है और कपड़ा उद्योग में इस्तेमाल होने वाला रासायनिक पदार्थ व एसेसरीज आइटम का आयात नहीं हो रहा है, जिससे घरेलू कपड़ा उद्योग पर असर पड़ा है. Also Read - Coronavirus: US में 16,000 से ज्‍यादा लोगों की मौत‍, 24 घंटें में 1783 मरे, दुनिया में 95000 Deaths

कारोबारी बताते हैं कि चीन से केमिकल्स और एसेसरीज आइटम का आयात नहीं होने से घरेलू कपड़ा उद्योग की लागत बढ़ गई है, जिससे आने वाले दिनों कपड़ा महंगा हो सकता है. कान्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सीआईटीआई) के पूर्व अध्यक्ष संजय जैन ने आईएएनएस को बताया कि घरेलू कपड़ा उद्योग के प्रोसेसिंग खर्च में 10 फीसदी का इजाफा हो जाएगा जिससे आने वाले दिनों के कपड़े का दाम बढ़ जाएगा. कारोबारियों के अनुसार, घरेलू कपड़ा उद्योग की लागत खर्च बढ़ने से तैयार कपड़े व परिधानों के दाम में इजाफा होगा जिससे भारतीय उत्पादों के निर्यात पर आने वाले दिनों में असर पड़ सकता है. भारत हालांकि चीन को तैयार कपड़ा निर्यात नहीं करता है, लेकिन चीन भारतीय रूई व धागों का बड़ा खरीदार है, लेकिन चीन में कोरोना वायरस का प्रकोप गहराने से इन उत्पादों का निर्यात ठप पड़ गया है. Also Read - 5 गाड़ियां, 23 लोग, इटली के बॉडी गार्ड्स; इस तरह सैर-सपाटे पर निकला कारोबारी, गृह विभाग के सचिव हटाए गए

हालांकि वर्धमान टेक्सटाइल्स के वाइस प्रेसीडेंट ललित महाजन का कहना है भारतीय कॉटन एवं टेक्सटाइल्स उद्योग पर चीन में फैले कोरोना वायरस का प्रभाव चीन में फैले कोरोना वायरस का अल्पावधि में नकारात्मक प्रभाव रहेगा, लेकिन लंबी अवधि में इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है. उन्होंने कहा कि अल्पावधि में कारोना वायरस नकारात्मक प्रभाव इसलिए रहेगा, क्योंकि चीन को रूई और धागों का निर्यात नहीं हो पा रहा है. चीन दुनिया में रूई का बड़ा खरीददार है, लेकिन कोरोना वायरस के कारण वहां परिवहन व उद्योग-धंधों पर असर पड़ने के कारण रूई का आयात नहीं हो रही है जिसके कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रूई के दाम में गिरावट आई है.

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रूई का भाव बीते एक महीने में चार फीसदी से ज्यादा टूटा है, हालांकि भारतीय बाजार में रूई के दाम में तकरीबन दो फीसदी की गिरावट आई है. कारोबारी बताते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय रूई की मांग इसलिए ज्यादा होती है कि वह अन्य देशों की रूई से सस्ती है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रूई की कीमत घटने से भारतीय रूई की मांग में कमी आ सकती है. कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अतुल गणत्रा ने हाल ही में आईएएनएस से बातचीत में बताया था कि चालू कॉटन सीजन 2019-20 (अक्टूबर-सितंबर) में भारत ने चार लाख गांठ रूई चीन को निर्यात किया है और फरवरी में पांच लाख गांठ और निर्यात होने की उम्मीद है.

(इनपुट-आईएएनएस)