Coronavirus Effect on Indian Economy: कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था तबाही के कगार पर है. अमेरिका सहित तमाम आर्थिक ताकतें इसका असर झेल रही हैं. वहीं भारत भी इससे अछूता नहीं है. रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने गुरुवार को कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के घटकर 0.8 प्रतिशत रह जाने का अनुमान है. कोरोना वायरस महामारी के चलते लागू किए गए लॉकडाउन और वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण ऐसा किया गया. Also Read - Covid-19 Vaccination In Maharashtra: महाराष्ट्र में अब तक 1.8 करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकरण

फिच रेटिंग्स ने अपने वैश्विक आर्थिक अनुमानों में कहा कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के दौरान घटकर 0.8 प्रतिशत रह जाएगी, जबकि बीते वित्त वर्ष के दौरान यह आंकड़ा 4.9 प्रतिशत (अनुमानित) था. रेटिंग एजेंसी ने कहा कि हालांकि 2021-22 में वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रह सकती है. Also Read - Covaxin Price/Covishield price: प्राइवेट अस्पतालों में कितने रुपये खर्च करने पर मिलेगी कोरोना की वैक्सीन, जानें अपने शहर का रेट

रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में लगातार दो तिमाहियों के दौरान नकारात्मक वृद्धि रहेगी. अप्रैल से जून तिमाही के लिए यह नकारात्मक 0.2 प्रतिशत और जुलाई से सितंबर तिमाही के लिए यह नकारात्मक 0.1 प्रतिशत रह सकती है. Also Read - COVID-19 Cases in India Today: देश में 3.66 लाख नए केस आए, 3.53 लाख ठीक हुए, 3,754 मौतें हुईं

फिच का अनुमान है कि इसके अगली तिमाही में वृद्धि दर 1.4 प्रतिशत रह सकती है. फिच का कहना है कि वित्त वर्ष 2021 में वृद्धि दर में गिरावट की मुख्य वजह उपभोक्ता खर्च में कमी होगी, जो 5.5 प्रतिशत से घटकर 0.3 प्रतिशत रह जाएगी. रेटिंग एजेंसी ने वैश्विक जीडीपी पूर्वानुमानों में भी बड़ी कटौती की है. फिच रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कुल्टन ने कहा कि विश्व जीडीपी के 2020 में 3.9 प्रतिशत गिरावट का अनुमान है, जिसका असर 2009 की मंदी के मुकाबले दोगुना होगा.