एक अध्ययन में यह दावा किया गया है कि कोविड -19 के बचने के लिए 18 साल से अधिक आयु के सभी भारतीयों को टीका लगाने का खर्च देश की वार्षिक जीडीपी के एक प्रतिशत से भी कम आएगी.Also Read - हफ्ते में सिर्फ 3 दिन जाना होगा ऑफिस, 8 फीसदी बढ़ेगी सैलरी; जानिए - कौन सी कंपनी दे रही है यह सुविधा

बता दें, यह अनुमान ऐसे समय में जारी किया गया है जब केंद्र और राज्य कोविड -19 टीकों के मूल्य निर्धारण के अंतर पर बहस करने में लगे हुए हैं. हालांकि, अगर केंद्र और राज्य सरकारें 18 साल से अधिक उम्र के सभी भारतीयों को टीका लगाने में सहयोग करें, तो अनुमानित 133 करोड़ में से 84.2 करोड़ लोगों को टीका लगाने का खर्च 671.93 अरब डॉलर आएगा. Also Read - भारत में Omicron के सब वेरिएंट BA.5 के एक और मरीज की पुष्टि, दक्षिण अफ्रीका से वडोदरा आया था शख्स

इंडियन रेटिंग्स के अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि 84 करोड़ लोगों के टीकाकरण का खर्च केंद्र सरकार को 208.70 अरब रुपये उठाना पड़ेगा, जबकि राज्य सरकारों को 463.23 अरब रुपये की संयुक्त राशि खर्च करनी पड़ेगी. Also Read - सऊदी अरब में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामले, भारत समेत इन देशों में यात्रा करने पर लगा प्रतिबंध

अध्ययन में किया गया दावा, बुधवार को घोषित वैक्सीन के मूल्य फार्मूले पर आधारित है.

जीडीपी का महज 0.36 फीसदी आएगा खर्च

इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि 671.93 अरब डॉलर देश की वार्षिक जीडीपी का महज 0.36 प्रतिशत है, जो बहुत बड़ी राशि नहीं है.

अगर केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों के बीच लागत का बोझ अलग हो जाता है, तो केंद्र के बजट पर राजकोषीय प्रभाव जीडीपी का 0.12 प्रतिशत और राज्य के बजट पर 0.264 प्रतिशत होगा.

इंडिया रेटिंग्स के मुताबिक, समस्या की गंभीरता और आर्थिक लागत को देखते हुए कोविड -19 महामारी की दूसरी लहर का अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ने की संभावना है, लेकिन, उसकी तुलना में यह राशि काफी कम है.

अध्ययन के अनुसार, अधिकतम प्रभाव बिहार के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) पर 0.60 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश के बाद (0.47 प्रतिशत), झारखंड (0.37 प्रतिशत), मणिपुर (0.36 प्रतिशत), असम पर होगा. 0.35 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (0.30 प्रतिशत) और ओडिशा (0.30 प्रतिशत) आएगा.

अध्ययन के मुताबिक, टीकों की कुल आवश्यकता में से, 504.90 अरब की धनराशि में 21.4 करोड़ रुपये खुराक की खरीद के लिए पहले ही खर्च की जा चुकी है और शेष राशि 1,554 मिलियन डोज़ की खरीद के लिए खर्च की जाएगी.

हालांकि, अध्ययन ने संकेत दिया कि यह केंद्र और राज्य के बजट पर एक आवर्ती खर्च होगा क्योंकि कोविड -19 टीकों द्वारा उत्पन्न एंटीबॉडी 12-18 महीनों तक चलने की संभावना है.

गौरतलब है कि अध्ययन में इस तथ्य पर भी ध्यान दिया गया है कि कई राज्य जैसे केरल, छत्तीसगढ़, बिहार और मध्य प्रदेश पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वे 18 साल से ऊपर के लोगों के टीकाकरण का खर्च वहन करने के लिए तैयार हैं.

अध्ययन में इसके बारे में ध्यान दिया गया है कि बड़े कॉर्पोरेट समूहों द्वारा टीकाकरण से राज्य और केंद्रीय बजट पर दबाव कम हो जाएगा.

टीकाकरण की रफ्तार तेज करने की जरूरत

इंडियन रेटिंग्स अध्ययन में यह भी कहा गया है कि कोविड -19 के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण कारक इस बात पर निर्भर करेगा कि टीकाकरण के वांछित स्तर को कितनी जल्दी हासिल किया जा सकता है.

इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार का रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी और अमेरिका, यूरोपीय संघ (ईयू) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुमोदित अन्य टीकों के आपातकालीन उपयोग की अनुमति देने का निर्णय “सही दिशा में एक कदम है”.

कोविड -19 की दूसरी लहर के मद्देनजर देश में खतरनाक गति के साथ, केंद्र सरकार ने कोविड -19 टीकाकरण के लिए एक उदार और त्वरित तीसरे चरण की रणनीति का ऐलान किया है.

इस रणनीति के तहत, 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्ति 1 मई, 2021 से कोविड -19 वैक्सीन की खुराक हासिल करने के लिए पात्र होंगे. सरकार ने कहा है कि इस योजना के तहत कोरोनावायरस टीके का मूल्य निर्धारण, खरीद, पात्रता और प्रशासन को लचीला बनाया जाएगा.

चूंकि टीकाकरण अभियान पहले की तरह जारी रहेगा, जिसमें स्वास्थ्य वर्कर, फ्रंटलाइन वर्कर और 45 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी जैसे प्राथमिकता वाले लोगों को मुफ्त में टीकाकरण किया जाना है. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्माताओं से सीधे अतिरिक्त कोविड -19 वैक्सीन खरीदने और 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को टीकाकरण की अनुमति दी गई है.

इस नीति के परिणामस्वरूप, भारतीय वैक्सीन निर्माता अब अपने उत्पादन का 50 प्रतिशत केंद्र सरकार को आपूर्ति करेंगे और शेष 50 प्रतिशत राज्य सरकारों और खुले बाजार द्वारा खरीद के लिए उपलब्ध होगा.