क्रेडिट कार्ड को लेकर कभी न करें ये गलतियां, 24 घंटा लेट होने पर 1000 तक जुर्माना, 15 दिन में 100 पॉइंट तक गिर जाएगा CIBIL स्कोर

CIBIL स्कोर आपकी क्रेडिट हिस्ट्री का एक नंबर होता है, जो यह बताता है कि आपने पहले लिए गए लोन या क्रेडिट कार्ड बिल का पेमेंट समय पर किया है या नहीं. आइए जानते हैं क्रेडिट कार्ड का बिल पेमेंट करने में कितनी देरी पर आपके सिबिल स्कोर पर कितना असर होता है. अपना सिबिल सुधारने के लिए आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए:-

Written by: Anjali Karmakar
Published: October 9, 2025, 12:39 PM IST

इमरजेंसी के समय जब फाइनेंशियल हेल्प की जरूरत हो और मददमिले, तो आपका क्रेडिट कार्ड बहुत बड़ा सहारा साबित होता है. क्रेडिट कार्ड एक ऐसा कार्ड है, जो आपको पहले खर्च करने की सुविधा देता है. इसका बिल आप महीने के आखिर में पेमेंट करते हैं. कई लोग क्रेडिट कार्ड के बिल को लेकर कंफ्यूजन में रहते हैं. वो ड्यू डेट को इग्नोर कर देते हैं और अपनी सहूलियत के हिसाब से किसी दिन पेमेंट करते हैं. और तो और पूरा बिल पे करने के बजाय मिनिमम अमाउंट ड्यू ही पे करते हैं. हमें लगता है कि इससे कोई दिक्कत नहीं है. अगले महीने पूरा बिल दे दिया जाएगा. लेकिन, क्रेडिट कार्ड का बिल पेमेंट करने में आप जितनी देरी करते हैं. आपको उतना ज्यादा जुर्माना देना पड़ता है. इसके साथ ही आपका सिबिल स्कोर भी गिरता जाता है.

आमतौर पर अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड बिल या लोन की किस्त भरने में एक दिन की देरी कर देते हैं, तो आप पर 100 रुपये से 1000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है. हालांकि, बिल रीपेमेंट में 1 दिन से कम की देरी पर आपका क्रेडिट स्कोर तुरंत नहीं गिरता है. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां आपकी टाइमिंग और रिस्पॉन्स देखकर स्टेप लेती हैं.

क्या होता है सिबिल स्कोर?
CIBIL स्कोर आपकी क्रेडिट हिस्ट्री का एक नंबर होता है, जो यह बताता है कि आपने पहले लिए गए लोन या क्रेडिट कार्ड बिल का पेमेंट समय पर किया है या नहीं.ये स्कोर 300 से 900 के बीच होता है. जितना ज्यादा आपका स्कोर होगा, आपके लोन पास होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाएगी. हालांकि, इसके लिए आपको अपने CIBIL स्कोर पर ध्यान देने की बहुत जरूरत है.

अलग-अलग सिबिल स्कोर के मायने?

750 से 900 का रेंज: अगर आपका सिबिल स्कोर 750 से 900 के बीच है, तो इसे बहुत अच्छा माना जाता है. आपको हर तरह के लोन मिलने के ज्यादा चांसेस होते हैं. हो सकता है कि आपको कम रेट ऑफ इंटरेस्ट पर भी लोन मिल जाए.

700 से 749 का रेंज: अगर आपका सिबिल स्कोर 700 से 749 के बीच है, तो भी ये अच्छा स्कोर है. बैंक आपको भरोसेमंद मानते हैं. ऐसे में लोन अप्रूव होने में दिक्कत नहीं आती. लेकिन, लोन की एक लिमिट होगी.

650 से 699 का रेंज: अगर आपका सिबिल स्कोर 650 से 699 के बीच आता है, तो ये एवरेज स्कोर माना जाता है. इस केस में कुछ बैंक आपपर भरोसा जता सकते हैं, लेकिन ज्यादातर बड़े बैंक आपको शायद लोन न दें.

600 से 649 का रेंज: इसी तरह अगर आपका सिबिल स्कोर 600 से 649 के बीच आता है, तो इसे खराब माना जाता है. ऐसे में आपको कोई भी बैंक लोन देने से मना कर सकता है.

600 या इसके नीचे का रेंज: अगर आपका सिबिल स्कोर 600 के और भी नीचे है, तब इसे बेहद खराब माना जाता है. ऐसे में आपको कोई बैंक लोन नहीं देगा. आप जब भी अप्लाई करेंगे, आपकी एप्लिकेशन रिजेक्ट हो जाएगी. ऐसे में आपको क्रेडिट कार्ड की लिमिट भी कम मिलती है. हो सकता है कि आपको क्रेडिट कार्ड मिले ही नहीं.

कितने दिन की देरी पर क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है कितना असर?

  • अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड के बिल का पेमेंट करने में 1 या 2 दिन लेट करते हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. आमतौर पर ये क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट नहीं किया जाता और आपका स्कोर भी नहीं गिरता. बार-बार ऐसा करने से बैंक को आपकी आदत पर शक हो सकता है.
  • अगर आप 7 दिन तक बिल भरना भूल जाते हैं, तो ये भले ही रिपोर्ट न हो;मगर आपके रिकॉर्ड में जरूर दर्ज हो सकता है. खासतौर पर अगर आप बार-बार ऐसा करते हैं, तो बैंक इस पर ध्यान देने लगते हैं.
  • अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड का बिल भरने में 15-30 दिन की देरी करते हैं, तो सिबिल स्कोर पर असर पड़ना शुरू हो जाता है. 15 दिन की देरी पर 50 से 100 पॉइंट तक क्रेडिट स्कोर गिर सकता है. हालांकि, ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपकी क्रेडिट हिस्ट्री कैसी रही है.
  • अगर आपने 30 दिन तक पेमेंट नहीं किया, तो यह लेट पेमेंट CIBIL जैसी एजेंसियों को रिपोर्ट किया जाता है. इससे आपका स्कोर 90 से 110 पॉइंट तक गिर सकता है.
  • 60 दिन तक बिल न भरने पर बैंक इसे डिफॉल्ट की दिशा में पहला कदम मानते हैं. यहां से आपका स्कोर 130 से 150 पॉइंट तक गिर सकता है. बैंक आप पर भरोसा करने से कतराते हैं.
  • अगर 90 दिन की देरी हो,तो सिवियर डिफॉल्ट माना जाता है. बैंक अब रिकवरी एजेंसी या लीगल नोटिस की तरफ कदम बढ़ा सकते हैं.
  • अगर 120 दिन से ज्यादा हो जाए, तो आपकी क्रेडिट प्रोफाइल एकदम बिगड़ जाती है. भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो सकता है.

बार-बार MAD पेमेंट के क्या हैं नुकसान?
अगर आप बार-बार मिनिमम अमाउंट ड्यू से ही पेमेंट कर रहे हैं, तो आप लंबे समय के लिए इंटरेस्ट के जाल में फंस रहे हैं.इससे आपका सिबिल स्कोर खराब होता है. क्योंकि बैंक को लगता है कि आप अपने खर्चे कर्जे पर ही निकालते हैं. बैंक मिनिमम अमाइंट ड्यू पर लेट पेमेंट नहीं लेते, लेकिन जो अमाउंट बचता है उसपर भारी-भरकम ब्याज लिया जाता है. इसमें आप जो अमाउंट भरते हैं उसके बाद बचे हुए अमाउंट पर आपको 3% से 4% तक मंथली इंटरेस्ट एक्स्ट्रा देना होता है. यानी साल भर में 30% से लेकर 45% तक एक्स्ट्रा ब्याज देना होता है.

अगर क्रेडिट कार्ड का बिल EMI में चुकाए तो?
बैंक आपको क्रेडिट कार्ड का बिल EMI बेसिस पर भी चुकाने का मौका देती है.अगर आप क्रेडिट कार्ड के बिल का पेमेंट करने के लिए EMI ऑप्शन चुनते हैं, तो आपको इसके लिए एडिशिनल ब्याज चुकाना होगा. अगर आप 3 महीने की अवधि को चुनते हैं, तो बैंक आपसे सालाना 20% की ब्‍याज दर से चार्ज वसूल सकता है. एक साल की अवधि चुनने पर यह दर 15% हो सकती है.

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