
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
आज के समय में क्रेडिट कार्ड हमारी फाइनेंशियल लाइफ की एक जरूरी हिस्सा बन चुका है. क्रेडिट कार्ड एक ऐसा कार्ड है, जो आपको पहले खर्च करने की सुविधा देता है. इसका बिल आप महीने के आखिर में पेमेंट करते हैं. कई लोग क्रेडिट कार्ड की संख्या और इसके बिल को लेकर कंफ्यूजन में रहते हैं. ज्यादातर लोगों को लगता है कि एक से ज्यादा क्रेडिट कार्ड रखने से उनका क्रेडिट स्कोर या सिबिल स्कोर बढ़ जाएगा. लेकिन, सिबिल स्कोर का तो पता नहीं मगर ज्यादा क्रेडिट कार्ड रखकर जब इसे मैनेज करना मुश्किल हो जाए, तो आखिर में कर्ज का बोझ ही बढ़ता जाता है. आइए समझते हैं कि आपके पास कितने क्रेडिट कार्ड होने चाहिए? इसे लेकर RBI का क्या नियम है. एक से ज्याद क्रेडिट कार्ड रखकर भी आप कर्ज से जाल में फंसने से कैसे बच सकते हैं:-
एक शख्स मैक्मिमम कितने रख सकता है क्रेडिट कार्ड?
एक शख्स मैक्सिमम कितने क्रेडिट कार्ड रख सकता है, इसे लेकर भारतीय रिजर्व बैंक का कोई नियम नहीं है. आप जितने चाहे उतने क्रेडिट कार्ड रख सकते हैं. आपके ज्याद से ज्यादा क्रेडिट कार्ड रखने पर कोई पाबंदी नहीं होती है. लेकिन आपको इसका मैनेजमेंट करना आना चाहिए.
ज्यादा क्रेडिट कार्ड रखने चाहिए या नहीं?
कई लोग अक्सर अलग-अलग बैंकों के कई सारे क्रेडिट कार्ड रख लेते हैं. ऐसे लोग सोचते हैं कि इससे उनके पास क्रेडिट लिमिट बहुत ज्यादा हो जाएगी. ऐसा सोचना गलत भी नहीं है, लेकिन इससे मनी मैनेजमेंट करना मुश्किल हो सकता है. ज्यादा कार्ड होंगे, तो कंफ्यूजन भी ज्यादा होगा. हर कार्ड का बिल अलग-अलग डेट पर आएगा. ऐसे में आप हर महीने एक दो दिन बाद बस क्रेडिट कार्ड का बिल ही भरते रह जाएंगे. वहीं, अगर बिल पेमेंट में मिनिमम अमाउंट ड्यू का इस्तेमाल करने की आदत है, तो बैठे बिठाए अपने सिर पर कर्ज का बोझ बढ़ाते चलेंगे, जो जिंदगी भर कम नहीं होने वाला.
सिर्फ खर्चे बढ़ाएगा क्रेडिट कार्ड, कमाई पर कोई असर नहीं
एक के बाद एक क्रेडिट कार्ड अप्लाई करते वक्त अक्सर लोग ये भूल जाते हैं कि इससे न तो उनकी कमाई बढ़ेगी, न ही खर्च करने की ताकत. जितने ज्यादा क्रेडिट कार्ड होंगे, उसका इस्तेमाल होगा, उतने बिल आएंगे और इसे भरने में आपका खर्चा ही बढ़ेगा. बिल नहीं पेमेंट करेंगे या मिनिमम ड्यू पे करेंगे, तो कर्ज बढ़ेगा.
फिर कितने कार्ड रखना चाहिए?
अगर सेल्फ कंट्रोल करना जानते हैं, डिसिप्लीन्ड हैं. मैनेजमेंट क्वालिटी अच्छी है तो आपको एक ही क्रेडिट कार्ड रखना चाहिए. ताकि आप इसे अच्छे से मैनेज कर सके. अगर इनकम अच्छी है और कोई लोन नहीं चल रहा या अभी कोई लायबिलिटी नहीं है, तो आप 2 या ज्यादा से ज्यादा 3 कार्ड रख सकते हैं. लेकिन, इससे ज्यादा कतई नहीं.
टोटल आउट स्टैंडिंग और मिनिमम ड्यू अमाउंट को समझिए
टोटल आउट स्टैंडिंग का मतलब होता है आप क्रेडिट कार्ड का महीने भर में जो अमाउंट खर्चा गया है, उसका पूरा बिल पेमेंट करेंगे. जबकि मिनिमम ड्यू अमाउंट से मतलब यह है कि आपको क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल जारी रखने के लिए बिल पेमेंट की आखिरी तारीख तक कुछ अमाउंट पे करना है. ये ऑप्शन तब चुनना चाहिए, जब आपके पास पूरा बिल भरने के पैसे नहीं हो.
कितना होता है मिनिमम ड्यू अमाउंट?
मिनिमम अमाउंट ड्यू टोटल अमाउंट का 15% से लेकर 25% तक होता है. यूजर सोचते हैं कि सिर्फ 25% अमाउंट ही पे करने का मौका मिल रहा है. ऐसे में वो इसका लाभ ले लेते हैं. ऐसा बहुत इमरजेंसी में एक या दो बार करना ठीक है, मगर बार-बार मिनिमम ड्यू अमाउंट पे करने से आप इंटरेस्ट के जाल में फंस जाते हैं.
बार-बार MAD पेमेंट के क्या हैं नुकसान?
अगर आप बार-बार मिनिमम अमाउंट ड्यू से ही पेमेंट कर रहे हैं, तो आप लंबे समय के लिए इंटरेस्ट के जाल में फंस रहे हैं.इससे आपका सिबिल स्कोर खराब होता है. क्योंकि बैंक को लगता है कि आप अपने खर्चे कर्जे पर ही निकालते हैं. बैंक मिनिमम अमाइंट ड्यू पर लेट पेमेंट नहीं लेते, लेकिन जो अमाउंट बचता है उसपर भारी-भरकम ब्याज लिया जाता है. इसमें आप जो अमाउंट भरते हैं उसके बाद बचे हुए अमाउंट पर आपको 3% से 4% तक मंथली इंटरेस्ट एक्स्ट्रा देना होता है. यानी साल भर में 30% से लेकर 45% तक एक्स्ट्रा ब्याज देना होता है.
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