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CRUDE OIL PRICE:... तो रूस अब भारत को किफायती दर पर तेल देने की कर रहा है पेशकश?

CRUDE OIL PRICE: यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए हैं. ऐसे में रूस अब भारत को किफायती दर पर तेल देने की पेशकश कर रहा है.

Published: March 31, 2022 1:48 PM IST

By India.com Hindi News Desk | Edited by Manoj Yadav

CRUDE OIL PRICE:... तो रूस अब भारत को किफायती दर पर तेल देने की कर रहा है पेशकश?
(FILE PIC)

CRUDE OIL PRICE: यूक्रेन पर आक्रमण के बाद बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण रूस अब भारत को प्रत्यक्ष तौर पर तेल की बिक्री पर भारी छूट की पेशकश कर रहा है. प्रतिबंधों के बाद रूस के तेल का निर्यात कम हो गया है.

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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले के जानकार लोगों ने अपना नाम नहीं प्रकाशित करने के अनुरोध पर बताया कि प्रतिबंधों से प्रभावित देश युद्ध से पहले की कीमतों पर 35 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर भारत को तेल देने के लिए तैयार है. जबकि युद्ध से पहले की कीमतों में भी 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हो चुकी है.

उन्होंने कहा कि रूस चाहता है कि भारत इस साल के लिए अनुबंधित 15 मिलियन बैरल ले ले, जिसके लिए सरकारी स्तर पर बातचीत की जा रही है.

एशिया का नंबर 2 तेल आयातक उन मुट्ठी भर देशों में से है जो अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंधों को धता बताते हुए रूसी कच्चे तेल को दोगुना कर रहे हैं. पूरे यूरोप में खरीदारों के रूप में रूसी बैरल अधिक मात्रा में एशिया की तरफ पहुंच रहे हैं. भारत और चीन तेल के प्रमुख खरीदार हैं.

उन्होंने कहा कि रूस ने रूस के मैसेजिंग सिस्टम एसपीएफएस का उपयोग करके रुपये-रूबल-मूल्यवर्ग के भुगतान की भी पेशकश की है, जो भारत के लिए व्यापार को और अधिक आकर्षक बना सकता है. हालांकि, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और इस मामले पर संभवत: चर्चा की जाएगी जब रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव गुरुवार को दो दिवसीय यात्रा के लिए भारत आएंगे.

अनुबंध में अंतर्निहित एक खंड है कि इंडियन ऑयल तभी तेल खरीदेगा जब यह किफायती होगा. इसके बारे में लोगों का कहना है कि रूस द्वारा दी गई छूट को जोड़ने से तेल व्यापार को उच्च माल ढुलाई को भी व्यवहार्य बना सकता है.

बता दें, भारत रूस को दवाओं, इंजीनियरिंग सामानों और रसायनों के अधिक से अधिक निर्यात पर जोर देने की कोशिश कर रहा है ताकि तेल और हथियारों की खरीद से पैदा हुए अपने व्यापार अंतर को कम किया जा सके.

गौरतलब है कि भारत ने रूस की कार्रवाइयों के खिलाफ नरम रुख बनाए रखा है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने अपने पड़ोसी के आक्रमण पर मास्को को अलग-थलग करने और दंडित करने की कोशिश की है. भारत ने अंतरराष्ट्रीय दबाव में भी मास्को के हमले की सीधे शब्दों में निंदा नहीं की है.

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