सिंगापुर: कोरोना वायरस महामारी के चलते पैदा हुआ संकट खत्म होता नहीं दिख रहा है, जिससे एशियाई बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें सोमवार को 17 साल के निचले स्तर पर जा पहुंची. Also Read - Lockdown5.0 में खुलेंगे स्कूल, कॉलेज! केंद्र सरकार ने जारी किए नए दिशा-निर्देश, जानें अब क्या हैं नियम

अमेरिका में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 5.3 प्रतिशत गिरकर 20 डॉलर प्रति बैरल पर और अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 6.5 प्रतिशत गिरकर 23 डॉलर पर आ गया. Also Read - World No Tobacco Day 2020: किसी भी रूप में जानलेवा है तंबाकू, कोरोना काल में तो और भी घातक

कोरोना वायरस के चलते दुनिया भर में करीब 33,000 लोगों की मौत हो चुकी है और यूरोप तथा अमेरिका इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं. Also Read - Railway and Flights Rules and Regulations: 1 जून से बदलने वाले हैं रेलवे, बस और फ्लाइट्स के ये नियम, बरतनी होगी सावधानी

कोरोना वायरस से लड़ने के लिए दुनिया भर में सरकारें लॉकडाउन का सहारा ले रही हैं और यात्रा प्रतिबंध लागू किए गए हैं, जिसके चलते कच्चे तेल पर भारी दबाव है.

मांग में गिरावट के विपरीत कच्चे तेल की आपूर्ति में नाटकीय रूप से बढ़ोतरी हुई है और शीर्ष उत्पादक सऊदी अरब तथा रूस के बीच कीमत युद्ध चल रहा है.

रियाद ने पिछले सप्ताह कहा था कि वह उत्पादन में किसी कटौती के लिए मास्को के संपर्क में नहीं है, दूसरी ओर रूस के उप ऊर्जा मंत्री ने कहा था कि तेल की कीमत 25 डॉलर प्रति बैरल तक रूस के उत्पादों के लिए बुरी नहीं है. इससे यह संकेत मिला कि अभी दोनों पक्ष किसी सहमति से दूर हैं.