Decline In Affordable Housing Supply In Major Indian Cities Builders Shift Focus To Luxury Homes
देश के प्रमुख शहरों में एफोर्डेबल घरों की सप्लाई में कमी, बिल्डरों का लक्जरी घरों की ओर रुझान
देश के नौ प्रमुख शहरों में किफायती घरों की आपूर्ति 30% घटी. बिल्डर लक्जरी प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दे रहे हैं. बढ़ती मांग के बावजूद कमी जारी है, जिससे आवास संकट गहरा सकता है. सरकारी हस्तक्षेप आवश्यक है.
देश के नौ प्रमुख शहरों में एक करोड़ रुपये तक की कीमत वाले किफायती और मध्यम आय वर्ग के घरों की आपूर्ति पिछले साल 30 प्रतिशत घट गई. रियल एस्टेट डेटा विश्लेषण कंपनी प्रॉपइक्विटी की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में इस श्रेणी में केवल 1.99 लाख नए घर उपलब्ध कराए गए, जबकि 2023 में यह संख्या 2.83 लाख थी. 2022 में यह आंकड़ा 3.10 लाख था.
आवास संकट की ओर बढ़ते शहर
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शहरों में तेजी से रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, जिससे अधिक लोग इनकी ओर रुख कर रहे हैं. हालांकि, किफायती घरों की आपूर्ति में कमी के कारण बड़े शहरों में आवास संकट की स्थिति पैदा हो रही है. यदि यह समस्या जल्द हल नहीं की गई, तो भारत में भी ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे हालात बन सकते हैं.
बढ़ती मांग, घटती आपूर्ति
प्रॉपइक्विटी के सीईओ समीर जसूजा के अनुसार, अगले पांच वर्षों में पहली श्रेणी के शहरों में रहने वाली आबादी में तेज़ी से वृद्धि होगी. एकल परिवारों की संख्या बढ़ने और रोजगार के अवसरों के चलते अगले पांच वर्षों में इन शहरों में 1.5 करोड़ नए घरों की आवश्यकता होगी.
बिल्डरों की प्राथमिकता बदल रही
रिपोर्ट में कहा गया कि बिल्डर अब लक्जरी और प्रीमियम सेगमेंट पर अधिक ध्यान दे रहे हैं, जिससे मध्यम वर्गीय और किफायती घरों की आपूर्ति कम हो गई है. इसका असर उन परिवारों पर पड़ रहा है जो बड़े शहरों में कम बजट में घर खरीदना चाहते हैं.
सरकार से हस्तक्षेप की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इस समस्या का समाधान निकालने के लिए नीतिगत सुधार करने चाहिए. किफायती आवास योजनाओं को बढ़ावा देने और बिल्डरों को इस क्षेत्र में निवेश के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है.
शहरीकरण और भविष्य की चुनौतियां
शहरों में लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण किफायती आवास की मांग तेजी से बढ़ रही है. यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो घर खरीदना मध्यम वर्ग के लिए और भी मुश्किल हो सकता है.
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