नई दिल्ली: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने अपने सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि 8 नवंबर 2016 को हुई नोटबंदी के दौरान उसके सहयोगी बैंकों के अधिकारियों को ओवरटाइम के लिए दिए गए रुपयों को वापस लिया जाए. अंग्रेजी वेबसाइट बिजनेस लाइन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक एसबीआई का मानना है कि नोटबंदी के टाइम पर ओवरटाइम के लिए दिया गया पैसा उसके अपने कर्मचारियों के लिए था और उस समय पांचों सहयोगी बैंक अपना संचालन खुद कर रहे थे. Also Read - Kisan Protest Latest News: कृषि बिल को लेकर बोले सुखबीर बादल- जीएसटी और नोटबंदी की तरह अब इसे थोपने पर लगी है केंद्र

बता दें कि 1 अप्रैल 2017 को एसबीआई के पांच सहयोगी बैंक स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर और स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर का एसबीआई में ही विलय हो गया था और ऐसे में इन पांचों बैंकों के 70 हजार अधिकारी और कर्मचारी भी एसबीआई का हिस्सा बन गए थे. Also Read - NITI Aayog: अगले वित्त वर्ष के अंत तक भारत की अर्थव्यवस्था महामारी के पहले के स्तर पर पहुंच जाएगीः नीति आयोग

एसबीआई का मानना है कि नोटबंदी के समय पर जो भी ओवरटाइम इन पांच बैंकों के कर्मचारियों ने किया था उसके लिए कंपेनसेशन उनके खुद के बैंकों को देना चाहिए क्योंकि पांच बैंकों का विलय अप्रैल 2017 में हुआ है ऐसे में कंपेनसेशन के लिए एसबीआई जिम्मेदार नहीं है और इन पांच बैंकों के कर्मचारियों को कंपेनसेशन का पैसा वापस लौटा देना चाहिए. Also Read - नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था को 'बर्बाद' किया, नरेंद्र मोदी ने कुछ पूंजीपतियों की मदद की: राहुल गांधी

एसबीआई ने यह भी कहा है कि इस साल की शुरुआत में कंपेनसेशन के लिए जारी किया गया नोटिफिकेशन सिर्फ एसबीआई के कर्मचारियों के लिए है. एसबीआई के इस फैसले से बैंक यूनियन नाराज है. यूनियन का कहना है कि एक तो पहले ही कई बार मांग रखने के बाद एक साल बाद ओवरटाइम का पैसा दिया गया था और अब उसे लौटाने के लिए कहा जा रहा है ऐसे में ये पूरी तरह से गलत है.