ईरान-अमेरिका और इजरायल जंग के बीच सरकार ने पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल पर बड़ा फैसला लिया है. जानकारी के अनुसार, डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. वहीं जेट फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट चार्ज 29.5 रुपये से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. हालांकि, पेट्रोल पर कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसकी एक्सपोर्ट ड्यूटी पहले की तरह शून्य रखी गई है.
The duty on export of diesel has been increased from Rs 21.5 per litre to Rs 55.5 per litre. Duty on ATF (Aviation Turbine Fuel) has been increased from Rs 29.5 per litre to Rs 42 per litre. Export duty on petrol continues to remain Nil: Finance Ministry pic.twitter.com/75qNV3mCJa
सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को काबू में रखना है. अगर तेल कंपनियां ज्यादा मात्रा में डीजल और जेट फ्यूल का निर्यात करती हैं, तो देश में इसकी कमी हो सकती है और कीमतें बढ़ेगी. सरकार ने एक्सपोर्ट को इसलिए महंगा कर दिया, ताकि कंपनियां पहले घरेलू जरूरतों को पूरा करें. आसान भाषा में कहें, तो सरकार चाहती है कि देश के लोगों को पहले सस्ता और पर्याप्त ईंधन मिले, उसके बाद ही विदेशों में सप्लाई की जाए. इससे महंगाई पर भी नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिलेगी.
तेल कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन तेल कंपनियों पर पड़ेगा, जो डीजल और जेट फ्यूल का निर्यात करती हैं. एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से उनकी कमाई पर असर पड़ सकता है और उन्हें अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव करना पड़ सकता है. हालांकि, पेट्रोल पर कोई बदलाव नहीं होने से इस सेगमेंट में काम करने वाली कंपनियों को राहत मिलेगी.
आगे क्या उम्मीद कर सकते हैं?
वैश्विक स्तर पर अभी तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं. ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, जो काफी ऊंचा स्तर है. हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर से कुछ राहत मिली है. उम्मीद है कि भविष्य में कीमतें कम हो सकती हैं, लेकिन अभी भी जोखिम बना हुआ है. ऐसे में सरकार का यह कदम एक तरह से एहतियाती कदम माना जा रहा है, ताकि देश में ऊर्जा की कमी न हो और कीमतें नियंत्रण में रहें.
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