हेल्थ पॉलिसी के नाम पर हो रहा स्कैम, कहीं आपका इंश्योरेंस फर्जी तो नहीं? 5 पॉइंट में करें चेक

हेल्थ इंश्योरेंस सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि आपके और बीमा कंपनी के बीच कानूनी समझौता है. इसके तहत आपको कुछ अधिकार मिलते हैं, जैसे- समय पर इलाज और पारदर्शी जानकारी पाने का अधिकार, उचित और सही तरीके से क्लेम मिलने का अधिकार.

Published date india.com Published: March 6, 2026 11:41 PM IST
हेल्थ पॉलिसी के नाम पर हो रहा स्कैम, कहीं आपका इंश्योरेंस फर्जी तो नहीं? 5 पॉइंट में करें चेक
सांकेतिक फोटो.

कोरोना महामारी के बाद से हेल्थ इंश्योरेंस या मेडिक्लेम पॉलिसी की मांग बढ़ी है. हेल्थ इंश्योरेंस होने से इमरजेंसी और गंभीर बीमारी के समय आपको इलाज कराने में मदद मिलती है. डिजिटलाइजेशन की वजह से हेल्थ इंश्योरेंस लेना बेहद आसान हो गया है. इंश्योरेंस एजेंट भी खुद आपसे कॉन्टैक्ट कर लेते हैं. परिवार की भलाई का सोचकर हम ज्यादा जांच-पड़ताल नहीं करते और जल्दबाजी में पॉलिसी ले लेते हैं. गड़बड़ी यहीं से शुरू होती है. इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर लाखों-करोड़ों को फ्रॉड हो रहा है.

ऐसे में ये समझना बहुत जरूरी है कि आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी असली है या नकली? इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर कैसे फर्जीवाड़ा किया जा रहा है? किन बातों का ध्यान रखकर आप खुद को इस फर्जीवाड़े से बचा सकते हैं:-

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कहां-कहां एक्टिव है ये बीमा फ्रॉड गैंग?
ये बीमा फ्रॉड गैंग ज्यादातर हिंदी भाषी इलाकों में एक्टिव हैं. इस गैंग में बीमा एजेंट से लेकर आशा वर्कर, ग्राम प्रधान, यहां तक की हॉस्पिटल और बैंक के कर्मचारी तक शामिल हैं.

कौन होते हैं ईजी टारगेट?
बीमार, बुजुर्ग और कम पढ़ी लिखी महिलाएं इस गैंग का ईजी टारगेट हैं. ये गैंग उनके परिवारों को सरकारी मदद और इंश्योरेंस का भरोसा देकर दस्तावेज़ हासिल कर लेते हैं और फिर मौत हो जाने के बाद बीमा का पैसा निकाल लेते हैं.

कैसे होता है स्कैम?
यूपी के संभल में और हाल के समय में दिल्ली के त्रिलोकपुरी में ऐसे बीमा स्कैम के मामले सामने आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ितों ने बताया कि पहले तो गैंग के लिए फौरी तौर पर मदद करते हैं. फिर उन्हें सरकारी स्कीम के बारे में बताते हैं और भरोसा दिलाते हैं कि वो सरकारी मदद पाने में उनकी हेल्प कर देंगे. मदद का झांसा देकर पहले गैंग जितना पैसा ले सकते हैं, ले लेते हैं. फिर डॉक्यूमेंट हासिल करते हैं. इसके बाद शुरू होता है असली फर्जीवाड़ा.

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डेटा में भी होता है बदलाव
BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीमा फ्रॉड गैंग अपने फायदे के लिए कई मरे हुए लोगों की आईडेंटिटी और डॉक्यूमेंट का इस्तेमाल कर चुके हैं. गैंग के लोगों ने स्कैम को अंजाम देने के लिए उनके पर्सनल डेटा में भी फर्जीवाड़ा करके बदलाव किया है. फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है.

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आपकी पॉलिसी असली है या नहीं कैसे पहचानें?

  1. आपका हेल्थ इंश्योरेंस असली है या नकली, इसे पहचानने के लिए सबसे पहले पॉलिसी पर दिए गए QR कोड को स्कैन करके उसकी प्रामाणिकता जांचें.
  2. IRDAI के नियमों के अनुसार हर पॉलिसी पर QR कोड होना अनिवार्य है.
  3. आप सीधे बीमा कंपनी से संपर्क करके पॉलिसी नंबर और अपनी जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं. इससे पता चल जाएगा कि आपकी पॉलिसी आईडी वैलिड है या नहीं.
  4. कोई भी पॉलिसी डायरेक्ट कंपनी की वेबसाइट से जाकर ही खरीदें.
  5. पॉलिसी खरीदने के लिए कभी भी कैश में पेमेंट न करें. हमेशा कंपनी के नाम पर चेक या ऑनलाइन पेमेंट ही करें.

हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम कब रिजेक्ट हो सकता है?

  • हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय उससे जुड़ी डिटेल्स को बारीकी से पढ़ना चाहिए, ताकि क्लेम का प्रोसेस आसान हो.
  • अगर आप वेटिंग पीरिएड पूरा होने से पहले क्लेम फाइल करते हैं, तो जाहिर तौर पर ये रिजेक्ट हो जाएगा.
  • अगर आप इंश्योरेंस लिमिट से ज्यादा क्लेम करेंगे, तो कंपनी इसे रिजेक्ट कर देगी.
  • अगर आपने अपनी हेल्थ या बीमारी के बारे में कोई भी जानकारी छिपाई, तो क्लेम रिजेक्ट हो सकता है.
  • इंश्योरेंस लेते समय आधी-अधूरी जानकारी देने और डॉक्यूमेंट प्रोवाइड नहीं कराने पर भी क्लेम रिजेक्ट हो जाता है.
  • अगर एक समय बाद आप क्लेम फाइल करेंगे, तो ये रिजेक्ट हो जाएगा.
  • अगर आप प्रीमियम टाइम से नहीं भरते या अपनी पॉलिसी रिन्यू नहीं कराते, तो भी क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा.

हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट न हो, उसके लिए क्या करना चाहिए?

  • अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ें. हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते समय अपने स्वास्थ्य से जुड़ी सही जानकारी दें.
  • किसी भी तरह की मेडिकल हिस्ट्री न छिपाएं. अगर आप स्मोकर हैं या ड्रिंक करते हैं तो यह जानकारी छिपाएं नहीं. वरना जरूरत पड़ने पर आपका क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा.
  • किसी भी अस्पताल में भर्ती होने पर तुरंत अपने हेल्थ इंश्योरेंस प्रोवाइडर को सूचना दें.
  • सभी जरूरी डॉक्यूमेंट जैसे डॉक्टर की रिपोर्ट, बिल, डिस्चार्ज समरी, टेस्ट रिपोर्ट सुरक्षित रखें.
  • नेटवर्क अस्पताल में कैशलेस क्लेम चुनें, वरना रीइम्बर्समेंट के लिए सभी दस्तावेज जमा करें.
  • अस्पताल में भर्ती की सूचना तुरंत कंपनी या TPA को दें.
  • अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को समय पर रिन्यू कराते रहें.

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