विदेश में खरीद रखी प्रॉपर्टी या बैंक में जमा है पैसा तो कितना देना होगा टैक्स? ITR भरने से पहले जान लें ये नियम

करीब 125 देशों के बीच इस समय इंफॉर्मेशन शेयरिंग एग्रीमेंट है. भारत 2018 से ही इस एग्रीमेंट में शामिल है. इसके तहत भारत को विदेशी बैंक अकाउंट, उनमें डिपॉजिट, प्रॉफिट, इंटरेस्ट और टोटल पेमेंट की इंफॉर्मेशन मिलती रहती है.

Written by: Anjali Karmakar
Updated: August 26, 2025, 8:55 PM IST

विदेशों में संपत्ति रखने वाले या खरीदने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) के आंकड़े बताते हैं कि 30,000 से ज़्यादा टैक्सपेयर्स ने 29,000 करोड़ रुपये की विदेशी संपत्ति घोषित की है. CBDT के एक अभियान के बाद यह खुलासा हुआ है. वहीं, भारत में रहने वाले कई लोगों और कारोबारियों का विदेश में बैंक अकाउंट भी है. स्विस बैंकों में भारतीयों का जमा पैसा 2023 के मुकाबले 2024 में तीन गुना बढ़कर 3.5 अरब स्विस फ्रैंक हो गया है. भारतीय रुपये में ये रकम करीब 37,600 करोड़ रुपय होती है. विदेश में खरीदी गई प्रॉपर्टी पर जाहिर तौर पर कमाई भी होती होगी. ऐसे में सवाल है कि विदेश में खरीदी गई प्रॉपर्टी या बैंक डिपॉजिट पर टैक्स के क्या नियम हैं?

125 देशों के बीच इंफॉर्मेशन शेयरिंग एग्रीमेंट
करीब 125 देशों के बीच इस समय इंफॉर्मेशन शेयरिंग एग्रीमेंट है. भारत 2018 से ही इस एग्रीमेंट में शामिल है. इसके तहत भारत को विदेशी बैंक अकाउंट, उनमें डिपॉजिट, प्रॉफिट, इंटरेस्ट और टोटल पेमेंट की इंफॉर्मेशन मिलती रहती है.

2015 में लाया गया था ब्लैक मनी एक्ट
काले धन पर रोक लगाने की जरूरत को समझते हुए साल 2015 में सरकार ने एक व्यापक कानून ‘काला धन अधिनियम’ लागू किया था. इस कानून के तहत टैक्स चोरी से बचने और क्रॉस बॉर्डर ट्रांजैक्शन में ट्रांसपिरेंसी के लिए अब अपने इनकम टैक्स रिटर्न में विदेशी प्रॉपर्टी और इनकम का खुलासा करना अनिवार्य है.

फॉरिन एसेट क्या है?
एक भारतीय नागरिक के नाते दूसरे देशों में बैंक अकाउंट खोलना, डिपॉजिट करना, प्रॉपर्टी खरीदना, स्टॉक, म्यूचुअल फंड और दूसरे कैपिटल एसेट में इंवेस्टमेंट करना, किसी विदेशी संस्था में वित्तीय हित या विदेश में इंश्योरेंस या कॉन्ट्रैक्ट हासिल करना फॉरिन एसेट में आता है.

ITR में इसका जिक्र करना क्यों है जरूरी?
ब्लैक मनी एक्ट 2015 के मुताबिक, जिन लोगों के विदेशी बैंक में अकाउंट हैं या फिर कोई जायदाद खरीद रखी है, तो उन्हें अब अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में इनकी जानकारी देनी होगी. जो लोग एक साल में कम से कम 180 दिन वापस घर आकर रहते हैं, उनके लिए विदेशी एसेट की जानकारी देने का नियम है. अगर आपका विदेश में बैंक खाता है, विदेश में लिए कर्ज या फिर इक्विटी, किसी यूनिट या व्यापार में वित्तीय हित हैं, अचल संपत्ति, कोई अन्य पूंजीगत एसेट के अलावा एफए लिस्ट में तय एसेट है, तो इसकी जानकारी देनी होगी.

कितने की सजा और जुर्माना?
अगर टैक्सपेयर्स ITR फाइलिंग के दौरान फॉरिन एसेट और इनकम की जानकारी नहीं देते है, तो चूक की गंभीरता के आधार पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट नोटिस भेजता है. ऐसे केस में 10 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जाता है. वहीं, मुकदमा चलाया जा सकता है. कुछ मामलों में गिरफ्तारी भी हो सकती है.

ITR में फॉरिन एसेट से हुई इनकम को कैसे करें डिक्लेयर?

  • ITR में विदेशी संपत्तियों की जानकारी देने के लिए आपको इनकम टैक्स एक्ट 1961 के शेड्यूल FA में डिटेल भरनी होगी.
  • सबसे पहले आपको विदेशों में खरीदी गई संपत्तियों, बैंक खाते, स्टॉक, अचल संपत्ति और अन्य प्रकार के वित्तीय साधनों की पहचान करनी होगी.
  • शेड्यूल FA में आपको देश का नाम, कोड, करेंसी कोड, ज़िप कोड, विदेशी संस्थान का नाम और पता, अकाउंट नंबर भरना होगा.
  • फिर आपको इंवेस्टमेंट की इनिशियल वैल्यू, ओपेनिंग बैलेंस, क्लोजिंग बैलेंस और अकाउंटिंग ईयर के दौरान मैक्सिमम बैलेंस की डिटेल भरनी होगी. ये डिटेल आपको फॉरिन और इंडियन दोनों करेंसी में भरना होगा.
  • अगर आपने किसी अकाउंटिंग ईयर के दौरान निवेश की बिक्री से कोई इनकम किया है, तो इसकी भी डिटेल फॉरिन और इंडियन दोनों करेंसी में देनी होगी.

संबंधित खबरे

Add India.com as a Preferred Source Add India.com as a Preferred Source

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Business Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.