नई दिल्ली. महिलाएं हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं और इसका परिणाम ये देखने को मिल रहा है कि वे नौकरी के क्षेत्र में भी लगातार बढ़िया कर रही हैं. अब इसपर एक रिसर्च ने भी मुहर लगा दी है कि वैश्विक लैंगिक अंतर (ग्लोबल जेंडर गैप) में कमी आई है. World Economic Forum के मुताबिक, आर्थिक अवसरों में अंतर की बात करें तो इसमें महिलाओं और पुरुषों में बहुत अंतर है और इसे पाटने में 202 साल लगेंगे. हालांकि, यहां बेहतर चीज है कि महिलाएं बिलुक्ल ट्रैक पर हैं और पुरुषों की तुलना में तेजी से आगे बढ़ रही हैं.Also Read - Karnataka Police Recruitment 2018: 2,113 पदों पर होगी भर्ती, ksp.gov.in पर करें ऑनलाइन आवेदन

0.1 फीसदी का अंतर
यह ग्रुप महिला और पुरुषों के बीच समानता को कई मापडंडो में देखता है. इस साल उसने ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट में लिखा है कि राजनीति, नौकरी और शिक्षा में लैंगिक असमानता में 0.1 फीसदी का अंतर आया है. इसका अर्थ है कि इसी रफ्तार से अंतर मिटता है तो इसमें समानता आने में 108 साल तक लग सकते हैं. आर्थिक अवसर की यह खाई भागीदारी, सैलरी और और कार्यबल में प्रगति की वजह से है, जिसे खत्म होने में काफी समय लगेगा. Also Read - China's two-child policy can increase gender disparity | दो बच्चों वाली नीति से चीन में बढ़ सकती है लैंगिक असमानता

पिछले साल की तुलना में बेहतर
बता दें कि यह रिजल्ट पिछले साल के रिजल्ट की तुलना में बेहतर है. इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक रूप से देखने पर लगता है कि ऐसा कोई देश नहीं है जहां विकास के लेवल, क्षेत्र और अर्थव्यवस्था के प्रकारों पर ध्यान दिए बिना लैंगिक समानता पाई जा सकती है. लैंगिक असमानता दुनिया की सच्चाई है और इसे हर क्षेत्र में देखा जाता है. 202 साल काफी ज्यादा होता है आर्थिक समानता के लिए.

ये कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार इसे समान वेतनमान नीति, पैतृक इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रेग्नेंसी के दौरान जॉब सिक्युरिटी से लेकर दूसरी लिगल सुरक्षा मुहैया कराकर इसे बेहतर कर सकती है. हालांकि, इसमें सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देशों में मिडिल ईस्ट के देश और नॉर्थ अफ्रीका के देश हैं. ग्लोबल मैनेजर की बात करें तो सिर्फ 34 फीसदी ही महिला हैं.