नई दिल्लीः आज केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार 2019-2020 का आर्थिक सर्वे संसद में पेश करेगी. पूरे देश की नजर इस सर्वे पर है. इस सर्वे के बाद मोटे तौर पर यह साफ हो जाएगा कि मौजूदा समय पर देश की आर्थिक स्थित क्या है. इसके माध्यम से यह मालूम हो सकेगा कि देश को कितना आर्थिक लाभ हुआ और कितना घाटे में रहा. भारत का व्यापार कैसा रहा और जीडीपी, निवेश और राजकीय घाटा संबंधी तथ्य भी इस सर्वे में उजागर होंगे. Also Read - Budget 2021 Update: किसानों के लिए किया गया बड़ा ऐलान, अब लागत से डेढ़ गुना ज्यादा मिलेगी MSP

अगर हम इकोनॉमिक सर्वे(Economic survey 2019-2020) के सबसे खास मुद्दे की बात करें तो जीडीपी पर सबका ध्यान है. पिछले एक साल से ज्यादा समय से भारत कि गिरती जीडीपी ग्रोथ को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार हमला करता रहा है और खुद सकार के लिए गले की फांस बनी रही है. अगर हम जीडीपी में किए गए अब तक के विभिन्न सर्वे की बात करें तो ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि 2019-20 में जीडीपी ग्रोथ रेट 5 फीसदी के आसपास ही रहेगा. Also Read - Economic Survey 2021: V-Shape में हुआ अर्थव्यवस्था में सुधार, जानिए-आर्थिक सर्वे की 10 बड़ी बातें

कल यानि शनिवार को 2020-2021 का आम बजट पेश होना है और ठीक एक दिन पहले आर्थिक सर्वे देश की आर्थिक रफ्तार को दिखाएगा. संसद के पटल पर आज वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण आर्थिक सर्वे पेश करेंगी. इस आर्थिक सर्वे से देश के तमाम सेक्टर्स की मौजूदा हालत सामने आएगी. Also Read - Union Budget Mobile App Launch: बजट से जुड़ा अब हर अपडेट मिल जाएगा फोन पर, ऐसे करें डाउनलोड

मुनाफे और घाटे का चलेगा पता
पिछले कुछ समय से देश में नौकरियों के होते कम अवसर और महंगाई ने सरकार के सामने एक नई चुनौती पेश की है अब इस आर्थिक सर्वे से यह भी दिखेगा कि सरकार द्वारा उठाए गए कदम से भारत कितना मजबूत हुआ और उसे पहले की अपेक्षा कितना फायदा या फिर कितना नुकसान हुआ.

आपको बता दें कि 2019 2020 का आर्थिक सर्वे केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति वी सुब्रमण्यन के नेतृत्व वाली टीम द्वारा तैयार किया गया है. आर्थिक सर्वे के दस्तावेज मुख्य रूप से तीन खण्डों में विभाजित किए जाते हैं जिसमें पहला- वॉल्यूम-1, दूसरा खण्ड- वॉल्यूम-2 होता है जबकि तीसरा खण्ड स्टैटिस्टिकल्स अपेन्डिक्स का होता है. देश का पहला आर्थिक सर्वे 1950-51 में पेश किया गया था. साल 1964 तक आर्थिक सर्वे को आम बजट के साथ ही पेश किया जाता था लेकिन बाद में इस नियम को बदल कर इसे आम बजट से ठीक एक दिन पहले पेश किया जाने लगा.